March 2, 2026

कुकुड़ा माई मंदिर की होगी नई पहचान


बागेश्वर । घने वनों के बीच बसे आस्था के एक प्राचीन धाम को अब पर्यटन की नई पहचान देने की तैयारी शुरू हो गई है। बागेश्वर जिले में स्थित कुकुड़ा माई मंदिर, जो वर्षों से श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र रहा है, अब प्रशासन की प्राथमिकता में है। जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे ने हाल ही में मंदिर क्षेत्र का निरीक्षण कर यहां मूलभूत सुविधाओं के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने की बात कही है।


उत्तराखंड के कुमाऊँ अंचल में लगभग 1400 मीटर की ऊंचाई पर बांस, काफल, देवदार और चीड़ के घने वनों के बीच स्थित कुकुड़ा माई मंदिर आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुपम संगम प्रस्तुत करता है। मां दुर्गा के अवतार रूप में पूजित देवी कुकुड़ा माई को समर्पित यह मंदिर क्षेत्रीय लोक आस्था का अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।

स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार देवी कुकुड़ा माई ने एक चरवाहे को स्वप्न में दर्शन देकर इस स्थान पर मंदिर निर्माण का निर्देश दिया था। तभी से यह स्थल श्रद्धालुओं की गहरी श्रद्धा और विश्वास का केंद्र बन गया। हर वर्ष अप्रैल माह में आयोजित होने वाला कुकुड़ा माई उत्सव हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है, जिससे यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी विशेष महत्व प्राप्त कर चुका है।

हाल ही में जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे ने मंदिर क्षेत्र का भ्रमण कर इसकी ऐतिहासिक और पौराणिक पृष्ठभूमि की जानकारी ली तथा यहां उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान पुलिस अधीक्षक जितेंद्र मेहरा और प्रभागीय वनाधिकारी आदित्य रत्ना भी मौजूद रहे। प्रशासन द्वारा मंदिर परिसर और मार्ग में सोलर लाइटें स्थापित की जा चुकी हैं, जबकि पेयजल और विद्युत व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है।

जिलाधिकारी ने कुकुड़ा माई मंदिर क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत संभावनाशील बताते हुए कहा कि जिला प्रशासन इस आध्यात्मिक और प्राकृतिक रूप से समृद्ध स्थल को बागेश्वर के प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। स्वच्छता, सुगम पहुंच मार्ग, बेहतर प्रकाश व्यवस्था और आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के माध्यम से इस क्षेत्र को धार्मिक और प्रकृति पर्यटन के मानचित्र पर एक सशक्त पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।