June 30, 2026

हिमालय की गोद में साहस का संगम: चोपता–तुंगनाथ ट्रेक ने गढ़ी छात्रों की नई पहचान


बागेश्वर गरुड । उत्तराखंड के दिव्य हिमालयी क्षेत्र में अवस्थित चोपता और विश्व के सर्वाधिक ऊँचाई पर स्थित शिव धाम तुंगनाथ मंदिर एक बार फिर युवा उत्साह, जिजीविषा और साहसिक चेतना के जीवंत साक्षी बने। पीएम श्री विद्यालय, जीआईसी गरुड़ के 35 छात्र-छात्राओं का दल प्रधानाचार्य जीएस नेगी के कुशल नेतृत्व में तीन दिवसीय साहसिक एवं प्रकृति अवलोकन यात्रा पर यहां पहुँचा, जिसने शिक्षा और अनुभव के समन्वय का एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।
समुद्र तल से लगभग 3680 मीटर की ऊँचाई पर स्थित तुंगनाथ की दुर्गम चढ़ाई इस यात्रा का सबसे चुनौतीपूर्ण पड़ाव सिद्ध हुई। ट्रेकिंग के दौरान अचानक हुए भारी हिमपात ने मार्ग को और अधिक कठिन बना दिया, किंतु छात्रों के उत्साह और आत्मबल के सामने प्रकृति की यह परीक्षा भी फीकी पड़ गई। बर्फ से ढके पथों पर दृढ़ कदमों के साथ आगे बढ़ते हुए उन्होंने न केवल हिमालय की अलौकिक सुंदरता का साक्षात्कार किया, बल्कि विषम परिस्थितियों में संयम, साहस और सामूहिकता का अद्भुत परिचय भी दिया।
यह यात्रा केवल एक साहसिक अभियान भर नहीं थी, बल्कि छात्रों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक सशक्त पहल रही। प्रकृति के सान्निध्य में रहकर उन्होंने नेतृत्व, सहयोग, अनुशासन और आत्मविश्वास जैसे जीवनोपयोगी गुणों को आत्मसात किया। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश भी उनके मन-मस्तिष्क में गहराई तक अंकित हुआ।
हिमाच्छादित पर्वतों की शांति, निर्मल वायु और आध्यात्मिक वातावरण ने छात्रों के अंतर्मन को स्पर्श किया, जिससे उनमें एक नई ऊर्जा और सकारात्मक दृष्टिकोण का संचार हुआ। इस यात्रा ने यह सिद्ध कर दिया कि जब शिक्षा कक्षा की सीमाओं से बाहर निकलकर प्रकृति के विस्तृत आकाश में प्रवेश करती है, तब उसका प्रभाव कहीं अधिक गहरा और स्थायी हो जाता है।
समग्र रूप से चोपता–तुंगनाथ की यह यात्रा साहस, ज्ञान और आत्मअनुभूति का अनुपम संगम बनकर उभरी, जिसने न केवल छात्रों को सशक्त बनाया, बल्कि उनके भीतर जीवन की चुनौतियों से जूझने का अदम्य आत्मविश्वास भी जागृत किया। इस अवसर पर एनसीसी एनओ एमसी जोशी, भगवती रावत और महीधर भट्ट सहित अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं भी मौजूद रहीं, जिनके मार्गदर्शन ने इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।