March 27, 2026

26 वर्षों बाद लौबाज गांव में गूंजा ‘ज्योनार’: आस्था, परंपरा और देवत्व का अद्भुत संगम


गरुड , बागेश्वर। उत्तराखंड की पावन धरती को देवभूमि की संज्ञा यूँ ही नहीं दी गई है। यहाँ की वादियों में बसती दिव्यता, हर गाँव में स्थापित ग्राम देवताओं की उपस्थिति और लोक-आस्था की सजीव परंपराएँ इस उपाधि को सार्थक करती हैं। जनपद बागेश्वर के गरुड़ क्षेत्र स्थित लौबाज गांव इन दिनों इसी दिव्यता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है, जहाँ 26 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पारंपरिक ‘ज्योनार’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है।
यह ज्योनार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही लोक-सांस्कृतिक आस्था का जीवंत उत्सव है। दस दिवसीय इस आयोजन में प्रतिदिन संध्या के समय गाँव के समस्त ग्राम देवताओं की सामूहिक पूजा-अर्चना की जा रही है। विशेष बात यह है कि इस दौरान देवी-देवताओं के मानव शरीर में अवतरण की मान्यता के साथ भक्तों को उनके साक्षात दर्शन प्राप्त होते हैं। इस ज्योनार में कुल 18 देवी-देवताओं की उपस्थिति मानी जा रही है, जो इसे अत्यंत विशिष्ट और दुर्लभ बनाती है।
इस अद्भुत आध्यात्मिक आयोजन को देखने के लिए दूर-दराज़ क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन लौबाज गांव पहुँच रहे हैं। पूरा क्षेत्र भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठा है, जहाँ हर संध्या एक अलौकिक वातावरण का सृजन होता है।
गाँव के निवासी एडवोकेट गिरीश कोरंगा ने बताया कि ग्रामीण वर्षों से इस ज्योनार के आयोजन की प्रतीक्षा कर रहे थे, किंतु देवताओं की इच्छा के बिना यह संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि 26 वर्षों के पश्चात यह अवसर प्राप्त होना स्वयं में एक चमत्कार है, जो देवकृपा का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक विरासत की सशक्त झलक भी प्रस्तुत कर रहा है।