Advertisement
Advertisement
Advertisement
October 12, 2026

गरुड़ में “सरकार जनता के द्वार” अभियान बना जनआवाज़ का मंच, तहसील दिवस में गूंजीं ग्रामीण समस्याएं


गरुड़ / बागेश्वर । विकासखंड गरुड़ के ग्वाडपजेड़ा गांव में मंगलवार को आयोजित “सरकार जनता के द्वार” अभियान एवं तहसील दिवस ग्रामीण जनसमस्याओं के समाधान का सशक्त मंच बनकर उभरा। प्रशासन और आमजन के बीच सीधे संवाद के इस महत्वपूर्ण आयोजन में पेयजल संकट, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, श्रम विभाग की लापरवाही, आवासीय समस्याएं तथा आधारभूत सुविधाओं से जुड़े अनेक मुद्दे प्रमुखता से उठे। अधिकारियों ने समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए अधिकांश मामलों के शीघ्र निस्तारण का भरोसा दिलाया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता उपजिलाधिकारी गरुड़ वैभव कांडपाल ने की। इस दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। तहसील दिवस में ग्रामीणों ने सबसे अधिक चिंता गांव में गहराते पेयजल संकट को लेकर जताई। ग्रामीणों ने कहा कि गर्मियों के दौरान कई क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति बाधित हो रही है, जिससे लोगों को रोजमर्रा के कार्यों में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा आंगनवाड़ी केंद्र में किचन व्यवस्था की समस्या भी प्रमुखता से उठाई गई। अधिकारियों ने संबंधित विभागों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
बैठक में श्रम विभाग की योजनाओं का लाभ न मिलने को लेकर ग्रामीणों में गहरा असंतोष दिखाई दिया। पात्र लोगों ने आरोप लगाया कि विभागीय प्रक्रियाओं में देरी और तकनीकी समस्याओं के कारण उन्हें योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों ने मांग की कि श्रम विभाग की योजनाओं को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए ताकि जरूरतमंद परिवारों को राहत मिल सके।
तहसील दिवस के दौरान श्रम विभाग की अनुपस्थिति सबसे बड़ा विवाद बनकर सामने आई। ग्वाड़ पजेना निवासी पुरुषोत्तम जोशी ने शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि वह पिछले चार महीनों से श्रम विभाग कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन विभाग का पोर्टल लगातार बंद पड़ा है। इसके चलते श्रम कार्ड अपडेट नहीं हो पा रहे हैं और श्रमिक योजनाओं का लाभ पूरी तरह प्रभावित हो गया है। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि जिस विभाग से रोजगार और सहायता की उम्मीद होती है, वही विभाग आम लोगों की समस्याओं के प्रति उदासीन बना हुआ है।
शिकायत सुनते ही एसडीएम वैभव कांडपाल ने मामले का तत्काल संज्ञान लिया। जब यह जानकारी मिली कि तहसील दिवस जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम में श्रम विभाग का कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं है, तो उन्होंने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। एसडीएम ने संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब करते हुए चेतावनी दी कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के इस सख्त रुख के बाद ग्रामीणों में उम्मीद जगी कि लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान अब संभव हो सकेगा।
उपजिलाधिकारी वैभव कांडपाल ने जानकारी दी कि आगामी 1 जुलाई से जीरामजी योजना के अंतर्गत गौशाला एवं आवास सुविधा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से ग्रामीण क्षेत्रों में दवाओं की उपलब्धता, आपूर्ति व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति की विस्तृत जानकारी भी ली। साथ ही निर्देश दिए कि दूरस्थ गांवों में रहने वाले लोगों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
तहसील दिवस में सुरक्षा दीवार निर्माण, आवासीय समस्याएं तथा अन्य विकास कार्यों को लेकर भी ग्रामीणों ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। ग्राम प्रधान मनोज कुमार सहित अनेक ग्रामीणों ने गांव की जमीनी समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए शीघ्र समाधान की मांग की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि सभी शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण कराया जाएगा तथा सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रभावी प्रयास किए जाएंगे।
ग्रामीणों और प्रशासन के बीच सीधे संवाद का यह आयोजन क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। कार्यक्रम ने न केवल लोगों को अपनी बात रखने का अवसर दिया, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और जनविश्वास को भी मजबूती प्रदान की।

Advertisement