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October 12, 2026

हरियाली, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बनी देवकी लघु वाटिका

नवागत वनाधिकारी प्रकाश चंद्र आर्य ने किया वाटिका का अवलोकन, बहुउपयोगी पौधों के संरक्षण और रोजगारपरक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर दिया जोर

बागेश्वर। जनपद में हरियाली को बढ़ावा देने के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में देवकी लघु वाटिका, मंडलसेरा एक प्रेरणादायी पहल के रूप में सामने आ रही है। नवागत वनाधिकारी बागेश्वर प्रकाश चंद्र आर्य, आईएफएस ने वाटिका का भ्रमण कर यहां किए जा रहे पौधरोपण, संरक्षण एवं रोजगारपरक कार्यों का अवलोकन किया। उन्होंने वाटिका में दशकों से संरक्षित एवं रोपित विभिन्न प्रजातियों को देखकर प्रसन्नता व्यक्त की और जनपद में हरियाली के संरक्षण एवं विस्तार के प्रयासों के लिए वाटिका से जुड़े लोगों की सराहना की।

वनाधिकारी ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में फलदार, चारा-पत्ती, औषधीय एवं बहुउपयोगी प्रजातियों का अधिक से अधिक रोपण पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर सकता है। उन्होंने सिलिंग, च्यूरा, जामुन, तिमूर, चंदन, अर्जुन, रुद्राक्ष, कचनार, रिंगाल और बाँस जैसी उपयोगी प्रजातियों के रोपण और संरक्षण को महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि सड़क चौड़ीकरण अथवा अन्य विकास कार्यों के दौरान भी पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए अधिक से अधिक फलदार, चारा-पत्ती और बाँस प्रजातियों का रोपण किया जाना चाहिए। इस दिशा में देवकी लघु वाटिका द्वारा किए जा रहे प्रयासों में उन्होंने व्यक्तिगत एवं विभागीय स्तर पर हरसंभव सहयोग देने पर सहमति जताई।

बाड़ सुरक्षा से लेकर आपदा न्यूनीकरण तक उपयोगी

वाटिका के कार्यों की सराहना करते हुए वनाधिकारी ने कहा कि स्थानीय प्रजातियों का योजनाबद्ध तरीके से रोपण केवल हरियाली बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मृदा संरक्षण, बाड़ सुरक्षा और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। पर्वतीय क्षेत्रों में मजबूत जड़ तंत्र वाले वृक्ष एवं बाँस जैसी प्रजातियां भूमि संरक्षण में उपयोगी साबित हो सकती हैं।

उन्होंने इस तरह के प्रयासों को ग्रामीणों के लिए रोजगार और आय का पूरक माध्यम बनाने पर भी जोर दिया।

मुगा रेशम के साथ खेती को नया आयाम देने की पहल

वाटिका में चल रही विभिन्न गतिविधियों के दौरान मुगा रेशम की खेती से जुड़े प्रयासों और फसलों के उत्पादन का भी अवलोकन किया गया। खास बात यह रही कि ऐसी फसलों एवं गतिविधियों को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई, जिन्हें सूअर, बंदर जैसे जंगली एवं आवारा पशुओं से अपेक्षाकृत सुरक्षित रखते हुए किसानों के लिए आय का साधन बनाया जा सके।

वनाधिकारी ने इस मॉडल को बड़े स्तर पर अपनाए जाने की संभावनाओं को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ऐसी गतिविधियों को व्यापक स्तर पर विकसित किया जाए तो किसानों के लिए यह अच्छी अतिरिक्त आमदनी का जरिया बन सकती है। इससे खेती के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण रोजगार को भी मजबूती मिलेगी।

रक्षाबंधन पर वृक्षों को बांधा रक्षासूत्र, दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर वनाधिकारी ने वाटिका में आयोजित पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी पहल की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि दशकों से वाटिका में रोपे गए पौधों और वृक्षों को रक्षासूत्र बांधना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि प्रकृति और वृक्षों के प्रति संरक्षण के संकल्प का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि वृक्ष संसार के प्राणी मात्र की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वास्तव में वृक्ष ही सबको बचाने वाले हैं, क्योंकि वे जीवन के लिए आवश्यक पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के साथ जल, मृदा, वायु और जैव विविधता के संरक्षण में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने रक्षाबंधन पर्व की शुभकामनाएं देते हुए लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी जिम्मेदारीपूर्वक देखभाल करने का आह्वान किया।

पुष्पगुच्छ से स्वागत, पौधे भेंट कर जताया आभार

वाटिका पहुंचने पर देवकी देवी ने नवागत वनाधिकारी प्रकाश चंद्र आर्य का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। वाटिका भ्रमण के दौरान वहां किए जा रहे विभिन्न कार्यों की जानकारी भी दी गई।

किशन सिंह मलड़ा ने वाटिका का भ्रमण एवं अवलोकन करने के लिए वनाधिकारी का आभार जताया। इस अवसर पर उन्हें पैशन फ्रूट और सीता अशोक के पौधे भेंट कर पर्यावरण संरक्षण एवं हरियाली के विस्तार के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

इस अवसर पर प्रशांत सिंह मलड़ा, भजन सिंह, शंकर राम, सचिन, दीपक आर्य, दया किशन भट्ट, मोहन सिंह हरड़िया, लक्ष्मी सहित बड़ी संख्या में नगरवासी मौजूद रहे।

देवकी लघु वाटिका का यह प्रयास इस बात की मिसाल बन रहा है कि यदि पौधरोपण को संरक्षण, स्थानीय संसाधनों, आजीविका और जनभागीदारी से जोड़ा जाए तो हरियाली के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दी जा सकती है।

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