September 11, 2026

गरुड़ में महंगाई, बेरोजगारी और जंगली जानवरों के आतंक पर गरजा उत्तराखंड क्रांति दल, राज्यपाल को भेजा ज्ञापन

यूकेडी ने कहा—आम जनता की कमर तोड़ रही महंगाई, भर्ती प्रक्रिया में देरी से युवाओं में बढ़ रही निराशा; पहाड़ों में वन्यजीवों का आतंक बना गंभीर चुनौती

बागेश्वर/गरुड़। उत्तराखंड में लगातार बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और पहाड़ी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी), ब्लॉक इकाई गरुड़ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन उपजिलाधिकारी गरुड़, जनपद बागेश्वर के माध्यम से प्रेषित किया गया है। यूकेडी ने इन तीनों गंभीर जनसमस्याओं के तत्काल समाधान के लिए राज्य सरकार से ठोस एवं प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

उत्तराखंड क्रांति दल के ब्लॉक अध्यक्ष गिरीश कोरंगा (एडवोकेट) की ओर से दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि राज्य में आम जनता लगातार बढ़ती महंगाई की मार झेल रही है। रसोई गैस, खाद्य पदार्थ, डीजल-पेट्रोल तथा दैनिक उपभोग की वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ने से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों का घरेलू बजट बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। संगठन ने कहा कि रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के कारण आम आदमी के लिए परिवार का पालन-पोषण करना लगातार कठिन होता जा रहा है।

युवाओं के भविष्य को लेकर यूकेडी ने उठाए सवाल

ज्ञापन में बेरोजगारी को उत्तराखंड की प्रमुख समस्याओं में शामिल करते हुए कहा गया कि राज्य के शिक्षित युवा रोजगार के अभाव में निराश हैं। सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर स्थायी भर्तियों की प्रक्रिया धीमी होने तथा लगातार सामने आने वाले पेपर लीक और भर्ती घोटालों के कारण युवाओं के भविष्य पर संकट गहराता जा रहा है।

यूकेडी ने कहा कि रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिलने के कारण प्रदेश के युवाओं का पलायन लगातार बढ़ रहा है। संगठन ने सरकार से सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से स्थायी भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है, ताकि प्रदेश के शिक्षित बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें और पहाड़ों से पलायन पर रोक लगाई जा सके।

वन्यजीवों का आतंक बना ग्रामीणों के लिए बड़ी चिंता

ज्ञापन में पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते वन्यजीव आतंक का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। यूकेडी ने कहा कि तेंदुए, बंदर, जंगली सूअर और भालू जैसे वन्यजीवों के आतंक से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। जंगली जानवरों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ मानव जीवन के लिए भी खतरा पैदा हो रहा है।

संगठन का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में वन्यजीवों की बढ़ती सक्रियता के कारण लोगों में भय का माहौल है और खेती-किसानी भी प्रभावित हो रही है। ऐसे में सरकार को केवल घटनाओं के बाद कार्रवाई करने के बजाय स्थायी और प्रभावी व्यवस्था विकसित करनी होगी।

यूकेडी की प्रमुख मांगें

उत्तराखंड क्रांति दल ने राज्य सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने कहा कि—

  • दैनिक उपभोग की वस्तुओं, रसोई गैस सिलेंडर और पेट्रोल-डीजल पर राज्य स्तर पर कर में राहत देकर महंगाई पर अंकुश लगाया जाए।
  • सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से स्थायी भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।
  • भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और घोटालों पर प्रभावी रोक लगाकर युवाओं के भविष्य को सुरक्षित किया जाए।
  • वन्यजीवों के आतंक से प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर फेंसिंग बढ़ाई जाए।
  • संवेदनशील क्षेत्रों में वनकर्मियों की गश्त बढ़ाई जाए, ताकि वन्यजीवों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखी जा सके।
  • वन्यजीवों से फसल एवं अन्य नुकसान होने पर प्रभावित ग्रामीणों को मुआवजा देने की प्रक्रिया सरल बनाई जाए और मुआवजा तत्काल उपलब्ध कराया जाए।

“जनहित में तत्काल ठोस निर्णय ले सरकार”

यूकेडी ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि ज्ञापन में उठाए गए जनहित के मुद्दों पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार एवं संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। संगठन ने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी और वन्यजीव आतंक जैसी समस्याएं सीधे तौर पर आम जनता के जीवन से जुड़ी हैं और इनके समाधान में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

यूकेडी ने स्पष्ट किया कि यदि इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो जनता की आवाज को और मजबूती से उठाया जाएगा। संगठन का कहना है कि पहाड़ के लोगों की समस्याओं का समाधान केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई से ही संभव है।

ज्ञापन देने वालो में प्रमुख रूप से राजेंद्र थायत, पूरन रावत, कैलाश चंदोला, विनोद पांडेय, महेश पांडेय आदि शामिल रहे।