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October 5, 2026

सौर ऊर्जा से स्वरोजगार की नई राह, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा पहाड़ का युवा

मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना से बागेश्वर के भुवन सिंह ने 200 किलोवाट की सौर परियोजना लगाने की पहल की

बागेश्वर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और पहाड़ी क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए संचालित योजनाओं का असर अब धरातल पर दिखाई देने लगा है। पारंपरिक रोजगार के सीमित अवसरों के बीच सौर ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों में युवाओं की बढ़ती रुचि आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के माध्यम से युवा न केवल खुद के लिए रोजगार के अवसर तलाश रहे हैं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में भी योगदान दे रहे हैं।

इसी कड़ी में जनपद बागेश्वर के विकासखंड बागेश्वर के ग्राम ओखलसो निवासी भुवन सिंह ने मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत 200 किलोवाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजना स्थापित करने की पहल की है। प्रस्तावित परियोजना की अनुमानित लागत करीब एक करोड़ रुपये है। योजना के अंतर्गत परियोजना लागत पर 50 प्रतिशत सब्सिडी उद्योग विभाग द्वारा दिए जाने का प्रावधान है और भुवन सिंह की परियोजना के लिए सब्सिडी संबंधी प्रक्रिया वर्तमान में गतिमान है।

गांव में रहकर स्वरोजगार की पहल

भुवन सिंह की यह पहल इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि पहाड़ के युवाओं के सामने रोजगार के लिए अक्सर मैदानी क्षेत्रों या बड़े शहरों की ओर पलायन करने की चुनौती रहती है। ऐसे में अपने गांव में ही सौर ऊर्जा परियोजना स्थापित करने का प्रयास स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावनाएं पैदा करता है।

सौर ऊर्जा परियोजना के माध्यम से गांव में उपलब्ध भूमि और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हुए ऊर्जा उत्पादन किया जाएगा। इससे जहां स्वच्छ एवं अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा, वहीं परियोजना के संचालन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है।

सरकारी योजना बनी स्वरोजगार का माध्यम

मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना का उद्देश्य राज्य में सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ युवाओं और उद्यमियों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने के लिए विभिन्न स्तरों पर सहयोग और प्रोत्साहन दिया जाता है।

भुवन सिंह द्वारा 200 किलोवाट की परियोजना के लिए आगे बढ़ाया गया कदम यह दर्शाता है कि सरकारी योजनाओं की जानकारी और उनका प्रभावी उपयोग युवाओं को पारंपरिक रोजगार से आगे बढ़कर नए क्षेत्रों में उद्यम स्थापित करने के लिए प्रेरित कर रहा है।

स्वच्छ ऊर्जा के साथ आर्थिक मजबूती की उम्मीद

सौर ऊर्जा को भविष्य की स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा के प्रमुख स्रोतों में माना जाता है। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में पर्याप्त धूप वाले क्षेत्रों का उपयोग सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जा सकता है। ऐसे में स्थानीय युवाओं की भागीदारी से छोटे और मध्यम स्तर की सौर परियोजनाओं को बढ़ावा मिलने पर राज्य की ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।

भुवन सिंह की प्रस्तावित परियोजना इसी दिशा में एक उदाहरण के रूप में सामने आई है। एक करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली 200 किलोवाट क्षमता की परियोजना में सरकारी सब्सिडी का लाभ मिलने से परियोजना स्थापित करने का आर्थिक भार कम होने की संभावना है। इससे अन्य युवाओं को भी अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश और स्वरोजगार के लिए प्रेरणा मिल सकती है।

आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में बढ़ता कदम

बागेश्वर के ओखलसो गांव के भुवन सिंह की पहल केवल एक सौर परियोजना स्थापित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पहाड़ में बदलती रोजगार की सोच का भी उदाहरण है। अब युवा सरकारी या पारंपरिक नौकरियों तक सीमित रहने के बजाय सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर स्वयं उद्यम खड़ा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के माध्यम से शुरू की गई यह पहल स्वच्छ ऊर्जा, स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, स्वरोजगार और ग्रामीण आर्थिक विकास को एक साथ जोड़ती है। यदि ऐसी परियोजनाओं को लगातार प्रोत्साहन मिलता रहा तो आने वाले समय में पहाड़ के गांवों में ही ऊर्जा उत्पादन और स्वरोजगार के नए अवसर विकसित हो सकते हैं।

भुवन सिंह का प्रयास यह संदेश देता है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग कर पहाड़ का युवा अपने गांव में रहकर भी बड़े स्तर पर आर्थिक गतिविधि शुरू कर सकता है। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में यह बढ़ती भागीदारी मुख्यमंत्री के आत्मनिर्भर उत्तराखंड के संकल्प को धरातल पर उतारने की दिशा में एक सकारात्मक कदम के रूप में देखी जा रही है।

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