बागेश्वर में 3 नवंबर से सजेगा सरस मेला, 35 स्टॉलों पर दिखेगी ग्रामीण हुनर की चमक
नुमाइशखेत मैदान में तीन दिन तक ग्रामीण उत्पादों की खरीद-बिक्री, महिला समूहों को मिलेगा बाजार | लोकगीत, लोकनृत्य, मेहंदी-एपण प्रतियोगिताओं के साथ बायर-सेलर मीट भी बनेगी आकर्षण
बागेश्वर। ग्रामीण महिलाओं के हुनर को बाजार देने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बागेश्वर में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। ग्राम्य विकास विभाग की ओर से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत तीन से पांच नवंबर तक नुमाइशखेत मैदान में सरस मेले का आयोजन किया जाएगा। तीन दिवसीय मेले में जहां ग्रामीण उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री होगी, वहीं स्थानीय लोकसंस्कृति, पारंपरिक कला और महिला उद्यमिता की भी झलक देखने को मिलेगी।
जिलाधिकारी अपूर्वा पाण्डे ने बताया कि सरस मेले का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना, उनके उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना और आजीविका के साधनों को मजबूत बनाकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करना है। मेले के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को अपने हुनर और उत्पादों को लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।
35 स्टॉलों पर प्रदर्शित होंगे ग्रामीण उत्पाद
मेले में कुल 35 स्टॉल लगाए जाएंगे। इनमें उद्योग, कृषि एवं उद्यान विभाग के साथ ग्रामोत्थान मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना तथा स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के उत्पाद प्रदर्शित किए जाएंगे। इन स्टॉलों के माध्यम से ग्रामीण उत्पादों की बिक्री भी होगी। इससे महिला समूहों को अपने उत्पादों के प्रचार-प्रसार, विपणन और नए ग्राहकों तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।
लोकसंस्कृति और पारंपरिक कला के रंग भी बिखरेंगे
सरस मेले में खरीदारी के साथ सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की ओर से लोकगीत, लोकनृत्य, मेहंदी और एपण प्रतियोगिताओं के साथ विभिन्न खेल गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों के जरिए उत्तराखंड की लोकपरंपराओं, पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
बायर-सेलर मीट से खुलेंगे कारोबार के नए रास्ते
मेले का एक प्रमुख आकर्षण बायर-सेलर मीट भी होगी। इसके जरिए महिला स्वयं सहायता समूहों को संभावित खरीदारों से सीधे जुड़ने और अपने उत्पादों के विपणन के नए अवसर तलाशने का मौका मिलेगा। इससे ग्रामीण उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने और महिला उद्यमों को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
लखपति दीदी के लक्ष्य को मिलेगी गति
जिलाधिकारी ने कहा कि सरस मेले के माध्यम से महिलाओं को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री का अवसर मिलेगा। इससे उनकी आय बढ़ाने, स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही, यह पहल लखपति दीदी के लक्ष्य को गति देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
तीन से पांच नवंबर तक नुमाइशखेत मैदान में आयोजित होने वाला यह मेला ग्रामीण उत्पादों, महिला उद्यमिता और उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को एक मंच पर लाने का अवसर बनेगा।
