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November 8, 2026

दीपावली : प्रकाश, समृद्धि और संस्कारों का अनुपम महापर्व

अर्जुन राणा

दीपों की जगमगाहट के साथ जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सद्भाव का संचार करने वाला दीपावली का पर्व भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिक चेतना, धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक है।

गरुड़, बागेश्वर । भारत पर्वों और त्योहारों की भूमि है। यहां प्रत्येक त्योहार अपने भीतर कोई न कोई आध्यात्मिक संदेश, सांस्कृतिक परंपरा और जीवन दर्शन समेटे हुए है। इन्हीं पर्वों में दीपावली का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। दीपावली केवल दीप जलाने, मिठाइयां बांटने और आतिशबाजी करने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और निराशा पर आशा की विजय का महापर्व है।

दीपावली का शाब्दिक अर्थ है—दीपों की पंक्ति। कार्तिक मास की अमावस्या की रात्रि को मनाया जाने वाला यह पर्व पूरे देश में हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम चौदह वर्ष का वनवास पूरा कर तथा रावण पर विजय प्राप्त कर जब अयोध्या लौटे थे, तब अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। तभी से दीपावली को प्रकाश और खुशियों के पर्व के रूप में मनाने की परंपरा प्रचलित हुई।

दीपावली का संबंध माता लक्ष्मी की आराधना से भी विशेष रूप से जुड़ा हुआ है। हिंदू धर्म में माता लक्ष्मी को धन, वैभव, ऐश्वर्य और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। मान्यता है कि दीपावली की रात्रि में विधि-विधान से माता लक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन करने से घर में सुख-समृद्धि, शांति और शुभता का आगमन होता है। हालांकि, लक्ष्मी की वास्तविक कृपा केवल धन प्राप्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें सद्बुद्धि, संतोष, परिश्रम और सदाचार भी शामिल हैं।

लक्ष्मी पूजन की विधि और धार्मिक महत्व

दीपावली के अवसर पर लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है। इस दिन श्रद्धालु अपने घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों की साफ-सफाई कर उन्हें दीपों, रंगोली और फूलों से सजाते हैं। मान्यता है कि स्वच्छ और पवित्र वातावरण में माता लक्ष्मी का वास होता है।

लक्ष्मी पूजन की सामान्य विधि इस प्रकार है—

1. घर और पूजा स्थल की स्वच्छता: दीपावली से पूर्व घर, दुकान और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर वहां सुंदर चौकी स्थापित करनी चाहिए। चौकी पर लाल या पीले रंग का स्वच्छ वस्त्र बिछाना शुभ माना जाता है।

2. पूजा की तैयारी: चौकी पर भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की प्रतिमाएं या चित्र स्थापित करें। साथ में भगवान कुबेर, मां सरस्वती तथा कलश की स्थापना भी परंपरा के अनुसार की जा सकती है। पूजा के लिए रोली, अक्षत, पुष्प, माला, धूप, दीप, घी, मिठाई, फल, पान, सुपारी, कलावा और पंचामृत आदि सामग्री रखनी चाहिए।

3. संकल्प और गणेश पूजन: सबसे पहले हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर परिवार की सुख-समृद्धि तथा मंगलकामना का संकल्प लें। इसके बाद विघ्नहर्ता भगवान गणेश का पूजन करें। भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना गया है, इसलिए लक्ष्मी पूजन से पहले उनकी आराधना की जाती है।

4. कलश पूजन: कलश में जल भरकर उसमें सुपारी, अक्षत और सिक्का डालें। आम के पत्ते और नारियल रखकर कलश की स्थापना करें। इसे शुभता और मंगल का प्रतीक माना जाता है।

5. माता लक्ष्मी का पूजन: माता लक्ष्मी को पुष्प, अक्षत, रोली, हल्दी, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। उन्हें कमल का फूल तथा खील-बताशे और मिठाई चढ़ाने की परंपरा भी है। इसके पश्चात माता लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें।

माता लक्ष्मी के इस सरल मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप किया जा सकता है—

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।

इसके बाद माता लक्ष्मी की आरती करें और परिवार के सभी सदस्यों के सुख, स्वास्थ्य, शांति तथा उन्नति की कामना करें।

6. कुबेर पूजन और बही-खाता पूजन: व्यापारी वर्ग इस दिन भगवान कुबेर तथा अपने व्यापारिक बही-खातों, तिजोरी और कार्यस्थल का पूजन करते हैं। इसका उद्देश्य व्यापार में ईमानदारी, उन्नति और आर्थिक स्थिरता की कामना करना है।

7. दीपदान और प्रसाद वितरण: पूजा के पश्चात घर के मुख्य द्वार, आंगन, तुलसी के पौधे तथा घर के विभिन्न स्थानों पर दीपक जलाने चाहिए। इसके बाद परिवार और पड़ोसियों के बीच प्रसाद एवं मिठाइयां वितरित कर प्रेम और सौहार्द का संदेश देना चाहिए।

यह ध्यान रखना चाहिए कि पूजा की विधि और मुहूर्त क्षेत्रीय परंपराओं तथा पंचांग के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार प्रदोषकाल और निर्धारित शुभ मुहूर्त में पूजा करना उचित है।

दीपावली का सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश

दीपावली का पर्व हमें केवल अपने घरों को रोशन करने की प्रेरणा नहीं देता, बल्कि समाज में व्याप्त अज्ञानता, ईर्ष्या, द्वेष और नकारात्मकता को दूर करने का संदेश भी देता है। एक दीपक जिस प्रकार स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाश देता है, उसी प्रकार मनुष्य को भी अपने जीवन में दूसरों के लिए सहयोग, सेवा और सद्भाव की भावना रखनी चाहिए।

आज के बदलते सामाजिक परिवेश में दीपावली के मूल संदेश को समझना और भी आवश्यक हो गया है। त्योहारों की खुशियां तभी सार्थक हैं, जब उनमें गरीबों, जरूरतमंदों और समाज के वंचित वर्गों की भी भागीदारी हो। हमें इस अवसर पर जरूरतमंद परिवारों की सहायता करनी चाहिए, स्थानीय कारीगरों और छोटे दुकानदारों से खरीदारी को प्राथमिकता देनी चाहिए तथा स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करना चाहिए।

इसके साथ ही दीपावली को पर्यावरण के अनुकूल मनाना भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। अत्यधिक आतिशबाजी से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण का बच्चों, बुजुर्गों, बीमार व्यक्तियों और पशु-पक्षियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए मिट्टी के दीपक जलाकर, प्राकृतिक सजावट अपनाकर और सीमित आतिशबाजी के माध्यम से इस पर्व की खुशियों को और अधिक सार्थक बनाया जा सकता है।

उत्तराखंड की लोकसंस्कृति में दीपावली

उत्तराखंड में दीपावली का पर्व विशेष उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। पहाड़ों में घरों की सफाई, पारंपरिक पकवानों की तैयारी, दीप प्रज्ज्वलन और परिवार के साथ सामूहिक पूजा का विशेष महत्व है। गांवों में दीपावली केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आपसी मेल-मिलाप, भाईचारे और लोकसंस्कृति को जीवंत रखने का अवसर भी है। इस दिन घरों में पकवान बनाए जाते हैं और लोग एक-दूसरे के घर जाकर शुभकामनाएं देते हैं।

अंत में…

दीपावली हमें यह संदेश देती है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयां और चुनौतियां क्यों न हों, आशा और सकारात्मकता का दीपक सदैव जलाए रखना चाहिए। माता लक्ष्मी की आराधना के साथ हमें परिश्रम, ईमानदारी, सदाचार और संतोष को भी अपने जीवन का आधार बनाना चाहिए, क्योंकि वास्तविक समृद्धि केवल धन-संपत्ति में नहीं, बल्कि स्वस्थ परिवार, शांत मन, अच्छे संस्कार और खुशहाल समाज में निहित है।

आइए, इस दीपावली हम संकल्प लें कि अपने घर के साथ-साथ किसी जरूरतमंद के जीवन में भी खुशियों का दीप जलाएंगे। समाज में प्रेम, सद्भाव, भाईचारे और मानवीय मूल्यों को मजबूत करेंगे तथा स्वच्छ, सुरक्षित और प्रदूषणमुक्त दीपावली मनाएंगे।

दीपों का यह पावन पर्व सभी के जीवन में सुख, शांति, आरोग्य, समृद्धि और नई ऊर्जा का संचार करे। हर घर में खुशियों का उजाला हो और हर हृदय में मानवता का दीप प्रज्ज्वलित हो।

आप सभी आखरीआंख डिजिटल मीडिया के सुधि विद्वान पाठकों व सभी शुभचिंतक मित्रो को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं!

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