Advertisement
Advertisement
Advertisement
October 20, 2026

हर सीट पर महिलाओं का वोट होगा निर्णायक

देहरादून ( आखरीआंख ) उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीटों पर महिला मतदाता भी अहम भूमिका निभाएंगी। प्रदेश में महिला वोटरों की संया 37 लाख से अधिक है, जो कि कुल मतदाताओं का 47 प्रतिशत है। नैनीताल सीट पर सबसे अधिक तथा अल्मोड़ा सीट पर सबसे कम महिला मतदाता हैं। पूर्व के चुनावों में भी उत्तराखंड में महिला मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी की है। अब देखना दिलचस्प होगा कि उत्तराखंड में मतदान करने में महिलाएं पुरुषों को पीछे छोड़ पाती हैं या नहीं। पिछले आम चुनाव में भी उत्तराखंड की महिलाएं मताधिकार का प्रयोग करने के मामले में पुरुषों से आगे थी। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में उत्तराखंड में 62.84 प्रतिशत महिला मतदाताओं ने मतदान किया था, जबकि पुरुषों का मत प्रतिशत 60.48 था। जानकारों का मानना है कि महिलाएं इस बार भी मतदान करने में पुरु षों से आगे निकल सकती हैं।इधर लोकसभा चुनाव 2018 के लिए प्रचार तेज हो चुका है। प्रदेश की पांचों लोकसभा सीटों गढ़वाल, टिहरी, हरिद्वार, अल्मोड़ा और नैनीताल के लिए 11 अप्रैल को पहले चरण में वोट डाले जाएंगे। उत्तराखंड में लोकसभा चुनाव में करीब 78,54, 023 मतदाता मतदान करेंगे। उत्तराखंड में प्रत्येक सीट पर पुरु षों मतदाता महिलाओं की तुलना में अधिक हैं। लेकिन वोट डालने के मामले में यहां की महिलाएं पुरु षों से आगे ही रहती हैं। जानकारों का मनाना है कि महिलाओं में साक्षरता दर और चुनाव के प्रति जागरूकता अधिक है। इस कारण से भी महिलाएं वोट करने के मामले में पुरु षों से आगे रहती आई हैं।उत्तराखंड में लोकसभा की गढ़वाल सीट पर महिला मतदाताओं की संया करीब साढे छह लाख, टिहरी सीट पर महिला मतदाताओं की संया करीब सात लाख, हरिद्वार सीट पर महिला मतदाताओं की संया करीब साढ़े आठ लाख, नैनीताल सीट पर महिला मतदाताओं की संया करीब साढ़े आठ लाख और अल्मोड़ा सीट पर महिला मतदाताओं की संया छह लाख चालीस हजार के करीब है।गौरतलब है कि उत्तराखंड आंदोलन में भी यहां की महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भूमिका निभाई थी। खास बात यह है कि प्रदेश में महिलाओं का शैक्षिक स्तर भी खासा अछा है। महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक भी हैं। जानकारों का कहना है कि उत्तराखंड में महिलाओं में चुनाव के प्रति खासी जागरूकता है। हर चुनाव में महिलाएं खासी संया में वोट करती हैं। उमीद है कि इस बार भी उत्तराखंड की महिलाएं मतदान के मामले में पुरु षों को फिर से पीछे छोड़ सकती हैं।

Advertisement