जंगलों की आग से सुरक्षा किसी बड़ी चुनौती और जोखिम
( आखरीआंख )
मौसम ने भले ही काफीदिनों तक साथ दिया हो, मगर अब धीरे-धीरे फैल रही जंगलों की आग यह संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में जंगलों की आग से सुरक्षा किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगी। इस पूरे परिपेक्ष में यदि विभागीय आंकड़ों पर ही गौर करें तो उत्तराखंड में आरक्षित वन क्षेत्रों का करीब 42 फीसद क्षेत्र आग के लिहाज से संवेदनशील है। इसमें तीन फीसद अति संवेदनशील और नौ फीसद मध्यम संवेदनशील श्रेणी में है। संवेदनशील क्षेत्रों को आग से बचाए रखना सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण है और इसी पर विभाग ने फोकस करने की ठानी है। इस बार आग बुझाने में ग्रामीणों का सक्रिय सहयोग लिया जाएगा।उत्तराखंड में हर साल फायर सड्डीजन (15 फरवरी से मानसून आने तक) आग से वन संपदा को बड़े पैमाने पर क्षति पहुंचती है। पिछले तीन सालों के आंकड़ों को ही देखें तो हर साल औसतन 3386 हेक्टेयर वन क्षेत्र आग से तबाह हो रहा है। जाहिर है कि वनों को आग से बचाने के मद्देनजर पेशानी पर बल पड़े हैं। जाहिर है कि इसके लिए सबसे पहले उन क्षेत्रों पर फोकस करना जरूरी है, जो आग की दृष्टि से संवेदनशील हैं और जहां बार-बार आग लगती है। इस सबको देखते हुए वन महकमे ने आकलन कराया तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। इसके मुताबिक कुल 1105970 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र आग के लिहाज से संवेदनशील है। मुय वन संरक्षक एवं नोडल अधिकारी (वनाग्नि) आरके मिश्रा के मुताबिक यह क्षेत्र आरक्षित वन क्षेत्र का करीब 42 फीसद है। अति संवेदनशील वे वन क्षेत्र हैं, जो गांवों से सटे हैं। गांवों से थोड़ी दूरी पर मौजूद वन क्षेत्रों को मध्यम संवदेनशील माना गया है। अग्निकाल में इन्हें पहली प्राथमिकता में रखा गया है। उन्होंने कहा कि जंगलों को आग से बचाना चुनौतीपूर्ण कार्य जरूर है, मगर विभाग ने इसकी सभी तैयारियां कर ली हैं। इस मर्तबा ग्रामीणों का सक्रिय सहयोग जंगलों को आग से बचाने में लिया जाएगा। संवेदनशील क्षेत्रों में क्रूस्टेशनों पर वनकर्मी चौबीसों घंटे मौजूद रहेंगे, ताकि कहीं भी आग की सूचना मिलने पर उस पर काबू पाया जा सके।
यह है संवेदनशील क्षेत्र
श्रेणी——————-क्षेत्र (हेक्टेयर में)
अति संवेदनशील———90700
मध्यम संवेदनशील——222370
संवेदनशील—————792900
जंगल की आग
वर्ष————प्रभावित क्षेत्र (हेक्टेयर में)
2016——4433.75
2017——1245.00
2018——4480.00
