March 3, 2026

लिनचौली के पास ऊपरी पहाड़ी से गिरा बड़ा पत्थर घोड़े में बैठी गोहेल भावना आई पत्थर की चपेट में, मौके पर मौत

 

रुद्रप्रयाग,  ( आखरीआंख )  इस वर्ष केदारधाम में अत्यधिक बर्फवारी के साथ ही बारिश हुई है, जिस कारण लिनचौली से केदारनाथ धाम तक बड़े-बडे ग्लेशियर उभर आये हैं। इन ग्लेशियरों में चलना तीर्थयात्रियों के लिए मुसीबत बन ही रहा है। साथ ही ऊपरी पहाड़ी से ग्लेशियर कब मौत बनकर बरस जाये, ये भी कहा नहीं जा सकता। सोमवार दोपहर के समय सवा दो लिनचौली से पांच सौ मीटर नीचे की और ऊपरी पहाड़ी से अचानक ग्लेशियर के बीच से एक पत्थर तेजी से आया, जिसकी चपेट में घोड़े में बैठी 55 वर्षीय गोहेल भावना बेन चांदु बाई पत्नी चांदु बाई निवासी शांनगोलापुरा जिला आनंद गुजरात निवासी आ गई। एसडीआरएफ एवं पुलिस के जवानों की मदद से महिला को स्वास्थ्य कैंप पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने महिला को मृत घोषित कर दिया। महिला के शव को हेलीकॉप्टर की मदद से गुप्तकाशी लाया गया। अब तक केदार यात्रा के दौरान 12 तीर्थयात्रियों की मौत हो चुकी हैं, जिनमें दो तीर्थयात्रियों की मृत्यु ऊपरी पहाड़ी से ग्लेशियर के कारण पत्थर गिरने से हुई है, जबकि आठ तीर्थयात्रियों की ऑक्सीजन की कमी के कारण सही समय पर ईलाज न मिलने और अन्य की ह्दयगति रूकने से हुई है। प्रशासन के लिए लिनचौली से केदारनाथ के बीच बड़े-बड़े ग्लेशियर चुनौती बन गये हैं। ग्लेशियर को पिघलाने और रिसर्च के लिए प्रशासन की ओर से वॉडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालियन जियोलॉजिकल को बुलाया गया, लेकिन अब तक इस कोई कार्यवाही नहीं हुई है। यदि समय रहते प्रशासन की ओर से ग्लेशियर पर रिसर्च और बर्फ पिघलाने के लिए कार्यवाही की जाती तो आज तीर्थयात्रियों को अपनी जान से हाथ नहीं धोना पड़ता। गत् 11 मई को पटियाला निवासी 28 वर्षीय ओजस्वी के ऊपर बर्फ का गोला गिरने के कारण उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। ये ग्लेशियर यात्रियों के लिए मौत बनकर बरस रहे हैं। पता नहीं कब कोई बड़ा हादसा हो जाये, ये भी नहीं कहा जा सकता है। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि समय रहते इन ग्लेशियरों का ट्रीटमेंट किया जाय और केदार यात्रा को सुरक्षित किया जाय। वहीं जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि ग्लेशियर के बीच से भारी पत्थर आने से तीर्थयात्री की मौत हुई है। उन्होंने बताया कि लिनचौली से केदारनाथ के बीच बड़े-बड़े ग्लेशियर मौजूद हैं, जिनकी ऊंचाई काफी है। वॉडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालियन जियोलॉजिकल को रिसर्च करने को कहा गया है। जल्द ही वॉडिया इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक केदारधाम पहुंचेंगे और ग्लेशियरों का अध्ययन करने के बाद समाधान निकाला जायेगा।

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