March 7, 2026

गरूड गंगा पर्नुजनन अभियान में जनजागरण जरूरी : जिलाधिकारी

बागेश्वर  ( आखरीआंख ) जिलाधिकारी रंजना राजगुरू की अध्यक्षता में गरूड गंगा पर्नुजनन अभियान के द्वितीय चरण हेतु नामित नोडल अधिकारियों के साथ एक आवश्यक बैठक संपन्न हुर्इ। इस बैठक में निदेशक एन0आर0डी0एम0एस0 प्रो0 जे0एस0 रावत ने पावर पाइंट के माध्यम से गरूड गंगा नदी के कैचमेंट एरिया के समस्त नोडल अधिकारियों को द्वितीय चरण में किये जाने वाले कायोर्ं के बारे में सैद्वान्तिक जानकारी दी। बैठक में उन्होंने नोडल अधिकारियों से कहा कि द्वितीय चरण का यह महत्वपूर्ण कार्य सभी की सहभागिता से पूर्ण कराया जाना है। उन्होंने कहा कि द्वितीय चरण में जो चाल-खाल, खन्तिया, टैं्रच व गडढे बनाये जाने है उसमें तकनीकी सहयोग की आवश्यकता होगी इसके लिए उन्होंने कहा कि जल्दी ही इस का प्रशिक्षण भी सम्बन्धितों को दिया जायेगा।
जिलाधिकारी रंजना राजगुरू ने कहा कि गरूड गंगा पुर्नजनन अभियान के प्रथम चरण की सफलता के बाद द्वितीय चरण में भी सभी लोगो का जनसहयोग आवश्यक है। जिलाधिकारी ने सभी नोडल अधिकारियों का निर्देशित करते हुए कहा कि वे सभी इस अभियान को प्राथमिकता के आधार पर लेते हुए अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन पूर्ण तत्परता से करें। उन्होंने सभी से इस अभियान में अपनी पूर्ण भागीदारी की अपील की। जिलाधिकारी ने कहा कि इस कार्य में जलनिगम, जल संस्थान, सिंचार्इ, कृषि एवं उद्यान सहित अन्य विभागों का भी सहयोग लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण एवं जल संवर्द्धन के लिए स्थानीय लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ भवनों पर रेन वाटर हारवेस्टिंग टैंक बनाने के लिए प्रेरित् किया जाय। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे स्थानीय लोगों से अपील करें कि वे इस कार्य में बढ़चढ कर भाग लें ताकि नदियों के घटते जलस्तर को बढ़ाया जा सके साथ ही आने वाली पीढ़ी के लिए हम जल संररक्षण का कार्य कर सकें। जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद में ऐसे बहुत से स्थान है जहॉ पर नदियों के जलस्तर को बढ़ाये जाने की जरूरत है जिसके लिए गरूड गंगा पुर्नजनन जैसे कार्यक्रम महत्वपूर्ण है। बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि आने वाले हरेला पर्व पर इस कार्यक्रम को और वृहद रूप दिया जायेगा उस दिन स्थानीय लोगो, जनप्रतिनिधियों, स्वंयसेवी संस्थाओं, स्कूली बच्चोंं व अधिकारी एवं कर्मचारियों को भी इस अभियान में जोडा जायेगा। बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य गरूड़ गंगा के जल समेत क्षेत्र में उपचार कार्य कर पुनर्जनन करना, रिचार्ज जोन की जल सम्मरण क्षमता में वृद्धि करना, पेयजल कृषि एवं उद्यान हेतु सिंचार्इ जल की मात्रा मे वृद्धि करना, ग्रामीणों की आजीविका में वृद्धि करना, पालयन की रोकथाम, जल संरक्षण हेतु जनजागरूकता मे वृद्धि करना, पर्यटन में वृद्धि करना, रोजगार के साधनो मे बढोत्तरी करना, मृदा क्षरण एवं भू-कटाव की रोकथाम एवं जैव विविधता का संरक्षण एवं विकास करना होगा।
निदेशक एन0आर0डी0एम0एस0 प्रो0 जे0एस0 रावत ने कहा कि रिचार्ज जोन के ऊपरी स्थानों पर चाल-खाल, खन्तिया आदि का कार्य किया जा रहा है जिसमें वर्षा जल अवशोषित होकर भूमि के अन्दर जायेगा एवं भूमिगत जलस्तर में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए विभिन्न रेखीय विभागों का आपसी समन्वय जरूरी है। बैठक के दौरान उन्होंने नोडल अधिकारियों को द्वितीय चरण के कायोर्ं के बारे में विस्तारपूर्वक बताया। इस दौरान सभी 09 रिचार्ज जोनो की समीक्षा की गयी। प्रो0 रावत ने गरूड गंगा नदी के जल स्तर बढाने के उपाय सुझाए, इसके लिए बायोलॉजिकल मैकिनिकल प्लॉन पर भी चर्चा हुर्इ। इस दौरान नोडल अधिकारियों ने अवगत कराया गया कि चाल/खाल/जलकुण्ड हेतु रिचार्ज जोन के टॉप एवं 30 डिग्री से ढाल वाले सूक्ष्म जलागम क्षेत्रो में चाल/खाल/जलकुण्ड प्रस्तावित है। सिविल एवं वन पंचायत भूमि में वनीकरण एवं संरक्षण कार्य मनरेगा के अन्तर्गत किये जायेंगे। आरक्षित वन में वनीकरण वनों की सुरक्षा योजना एवंज संरक्षण कार्य कैम्पा योजना के अन्तर्ग्ात किये जायेगे। तथा इस कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु जनजागरण की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी एस.एस.एस.पांगती, सहायक परियोजना निदेशक शिल्पी पंत, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ उदय शंकर, उद्यान अधिकारी तेजपाल सिंह, भूमि संरक्षण अधिकारी गीतांजलि बंगारी, सहित संबन्धित अधिकारी एवं नोडल अधिकारी मौजूद रहें।