March 13, 2026

उत्तराखंड का एक गाँव जहाँ 1962 के बाद से प्रधान चुनाव में नही डाले गये वोट

अल्मोड़ा। विकास खंड भिकियासैंण के दल्मोड़ी गांव में वर्ष 1962 के बाद से ग्राम प्रधान के लिये चुनाव नहीं हुआ है। पांच वर्ष में गांव के लोग आपसी विचार विमर्श कर निर्विरोध प्रधान चुन लेते हैं। इस बार के पंचायती चुनाव में यह परंपरा कायम दिखायी दे रही है। इस ग्राम पंचायत को निर्मल ग्राम पंचायत का दर्जा मिला हुआ है। नौला न्याय पंचायत के अंतर्गत वर्ष 1961 में कमराड़ ग्राम पंचायत से अलग होकर दल्मोड़ी ग्राम पंचायत अस्तित्व में आई। वर्ष 1967 में इसमें से एक और ग्राम पंचायत महैरनैल अस्तित्व में आई। इस ग्राम पंचायत का अपना इतिहास गवाह है कि आज तक गांववासियों ने प्रधान के लिये कभी वोट ही नहीं दिया। एक ओर जहां अन्य गांवों में प्रधानी के लिये मारामारी होती है। वहीं, दल्मोड़ी में गांव के लोग बैठककर एक के नाम पर सहमति जताते हैं। वहीं, प्रधान का टिकट लाता है। यहां पहले प्रधान शेर सिंह वर्ष 1962 से 67 तक दूसरे देवीदत्त मछपाल 1972 तक, तीसरे उमराव सिंह घुघत्याल लगातार 7बार वर्ष 1973 से 2008 तक ,चौथी भवानी देवी 2014 तक, पांचवें दिनेश घुघत्याल वर्ष जुलाई 2019 तक प्रधान पद पर सभी निर्विरोध चुने गये हैं। जो ग्राम पंचायत में सौहार्द माहौल बनाये रखने के लिये एक नजीर है।
कैलाश को निर्विरोध ग्राम प्रधान चुना- भिकियासैंण। दल्मोड़ी ग्राम पंचायत में प्रधान के लिये इस बार अनुसूचित जाति की आरक्षित सीट आई है। गांव में बैठककर लोगों ने पुरानी परपरा को जीवित रखते हुए स्नातक पास कैलाश राम को निर्विरोध प्रधान बनाने का निर्णय लिया है। जिसकी आधिकारिक घोषणा मतगणना के दिन होगी।
दो अक्तूबर को पीएम मोदी के हाथों होंगे समानित- भिकियासैंण। दल्मोड़ी में प्रत्येक घर में शौचालय बने हैं। वर्ष 2007 में राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने तत्कालीन प्रधान उमराव सिंह को दिल्ली में आयोजित हुए कार्यक्रम में निर्मल पुरस्कार से समानित किया था। इस बार ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन के लिये अल्मोड़ा जिले से सर्वश्रेष्ठ प्रधान का पुरस्कार के लिये निवर्तमान प्रधान दिनेश घुघत्याल को चुना गया है। उन्हें आगामी गांधी जयंती पर गुजरात में पीएम नरेंद्र मोदी के हाथों पुरस्कार दिया जाना है।