हिंदी का जलवा : चीन में 15 विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जा रही हिंदी
बागेश्वर। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के हिंदी के विभागाध्यक्ष तथा शंघाई अंतरराष्ट्रीय अध्ययन विश्वविद्यालय (सिसु) में आईसीसीआर चेयर पर विजिटिंग प्रोफेसर नवीन लोहनी ने बताया कि आज देश में ही नहीं विदेश में भी हिंदी का प्रचार बढ़ा है। चीन में इस वक्त 15 विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जा रही है। वहां के युवाओं को नौकरी देने में यह भाषा सबसे अधिक कारगर हो रही है। चीन भी अपना व्यवसाय पूरी दुनिया में फैलाने में हिंदी भाषा को अपना माध्यमम बना रहा है। लगभग ढाई वर्ष की सेवा के बाद अपने वतन लौटे लोहनी ने रविवार को यह बात टीआरसी में आयोजित पत्रकार वार्ता में कही। इस दौरान उन्होंने चीन में हिंदी अध्यापन एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा दिए जाने की बात को सांझा किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने सिसु में हिंदी के साथ संस्कृत अध्यापन भी किया। विद्यार्थियों के साथ भारतीयों के अनेक हिंदी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी रुचि लेकर कार्य किया। उन्होंने चीन और भारत के सांस्कृतिक संबंधों में प्रगति और विकास के लिए लेखन कार्य किया, रेडियो और टेलीविजन वार्ताएं प्रस्तुत कीं। भरतीय कौंसलावास के साथ ही शंघाई में भारतीय समुदाय द्वारा स्थापित अनेक सांस्कृतिक संस्थाओं के कार्यक्रमों में निरंतर प्रतिभागिता किया । हिंदी इन चाईना” नामक वीचैट समूह के द्वारा और चीनी और भारतीय समुदाय के बीच सौहार्द बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं और चीन में पहली हिंदी पत्रिका “समन्वय हिंची” प्रकाशन कार्य किया। जो चीन में लोकप्रिय हुईं। चीन के सियान, सियामेन, बीजिंग व शंघाई के विश्वविद्यालयों व संस्थाओं में वह शिक्षा, भारतीय सांस्कृतिक संबधों व भाषा अध्ययन पर व्यायान देने गए। उन्होंने बताया कि आज चीन में 50 अध्यापक हिंदी के हैं। इसके अलावा अनुवादक के पद पर कार्य कर रहे हैं। इतना ही नहीं 400 बचे हिंदी पढ़ रहे हैं। स्नातक से लेकर परास्नातक स्तर पर हिंदी पढ़ाई जा रही है। वहां गूलल पूरी तरह वैन है। बीचैट के माध्यमय से वहां के लोग सब कार्य करते हैं। आने वाले समय में चीन में गाइड के रूप में भी हिंदी बोलने वाले चीनी मिलेंगे। भाषा को लेकर वहां किसी को कई परेशनी नहीं है। उन्होंने बताया कि डोकलाम विवाद के समय में भी वे वहीं थे। तब भी वहां के लोगों को भाषा को लेकर कोई मतभेद नहीं था।
