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October 15, 2026

टनकपुर के अस्पताल में नहीं है एंटी रैबीज इंजेक्शन -18 मार्च 2019 को आया था 50 रैबीज के वायल का अंतिम स्टॉक

चपावत। टनकपुर में बंदरों और आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ता ही जा रहा है। हर गली मोहल्ले में छतों में बंदर तो सड़कों पर कुत्ते देखने को मिल जाते हैं। बंदर और कुत्तों के काटने पर इलाज के लिए लोगों को संयुक्त चिकित्सालय में एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है। इससे आम जनता को खासा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।संयुक्त चिकित्सालय में 18 मार्च 2019 को 50 रैबीज के वायल का अंतिम स्टॉक आया था। दो मई के बाद अस्पताल से एक भी रैबीज का वायल नहीं आया है। टनकपुर में आये दिन लोग बंदरों और आवारा कुत्तों का शिकार हो रहे हैं। बंदरो व कुत्तों के काटने पर तीन से पांच इंजेक्शन का कोर्स करना पड़ता है। जिसके लिए आम जनता को बाजार में 350 रुपये चुकाने पड़ते हैं। इससे लोगों को खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। संयुक्त चिकित्सालय में एक दिन में करीब दस से पन्द्रह मरीज बंदर और आवारा कुत्तों के काटे का इलाज कराने पहुंचते हैं। मगर मरीजों को रैबीज का इंजेक्शन न मिल पाने से परेशानी उठानी पड़ती है। सीएमएस एचएस ह्यांकी ने बताया कि सीएमओ को एंटी रैबीज वैक्सीन खत्म होने की जानकारी दी गई है।

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