आखिर देश की बेटी को मिल ही गया न्याय
-शुक्रवार सुबह साढ़े 5 बजे चारों दरिंदों को हुई फांसी
देहरादून। देश की बेटी निर्भया और उसके परिजनों को न्याय मिला। इसकी तस्सली निर्भया की मां के साथ समूचे दूनवासियों को भी होगी। देर आए दुरस्त आए, दोषियों को फांसी के बाद ये उमीद करनी चाहिए कि ये घटना और उसका परिणाम अपराधियों के मन में ख़ौफ़ पैदा करेगा। 16 दिसबर 2012 को जब ये घटना घटी दूनवासियों के मन में एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी, गुस्सा और गम था। पर जल्द ही साफ हो गया कि निर्भया राजपुर रोड के एक संस्थान में अपने सुनहरे भविष्य की नींव गढऩे के लिए पढ़ाई कर रही थी। तो दून के लोग सड़कों पर उतर आए। उसके सहपाठी छात्र, छात्राएं रैली जुलूसों में सबसे आगे रहते थे। घंटाघर के पास पार्क पार्क ऐसी कितनी ही केंडल मार्च, धरने प्रदर्शन का गवाह बना। इन स्वतफूर्त प्रदर्शनों ने दिल्ली और पुलिस प्रशासन पर भरपूर दबाव बनाया। निर्भया को मेडिकल सुविधाओ के लिए सिंगापुर तक ले जाया गया। दुर्भाग्य से जीवट वाली लड़ाई इस नियति से वह हार गई। एमजीआर उसके साथ उठ खड़े हो चुके लोग जाग चुके थे। देहरादून में ऐसे कई आंदोलनों में शामिल प्रदीप कुकरेती बताते हैं कि, निर्भया ने देशवासियों को जाग्रत करने के लिए खुद का बलिदान दिया। उसकी मां की अगुवाई में दिल्ली मे 7 साल 3 महीने लंबी कानूनी लड़ाई जीती। शुक्रवार सुबह साढ़े 5 बजे 4 दरिंदों को फांसी पर लटका देख हर कोई खुश है। हालांकि दून के लोगों का कहना है कि, सरकार को कानून की ऐसी कमियों को दूर करना होगा कि उन्हें सजा मिलने में कोई देरी न हो। सजा के डर से लोग लड़कियों का समान करें।
पूरे देश के लिए है न्याय की सुबह
निर्भया और उसके परिवार को न्याय मिलने में लंबा समय लगा है। अंत में न्याय और निर्भया की जीत हुई है। शुक्रवार की सुबह पूरे देश के लिए न्याय की सुबह थी। बालात्कार जैसे जघन्य अपराध से पूरा देश अंदर से टूट जाता है। निर्भया कांड हर वर्ग, जाति-धर्म के लोगों के लिए काला दिन था। उन सभी दोषियों को भी इस प्रकार की कड़ी सजा मिलनी चाहिए, जिन्होंने देश की लाखों बेटियों के साथ दुष्कर्म करने की कोशिश भी की है। साथ ही सरकार को इस प्रकार के आरोपियों को जल्द सजा देने के लिए न्याय व्यवस्था को सुधारना होगा।
– श्वेता राय तलवार, सामाजिक कार्यकर्ता
निर्भया के दोषियों को फांसी पर खुशी जताई
दिशा सामाजिक संस्था ने निर्भया के दोषियों को फांसी दिए जाने पर खुशी जताई है। सचिव सुशील विरमानी और उपाध्यक्ष प्रभात डंडरियाल ने कहा कि इस फैसले में भले ही देर हुई है, लेकिन ऐसा करने वालों के लिए यह सबक ही नहीं बल्कि दहशत का पर्याय भी बनेगा। अपराध करने वालों में खौफ पैदा होगा। संस्था ने कहा कि न्याय पालिका को इस तरह के अपराधों की सुनवाई में तेजी लाने और दोषियों को जल्द से जल्द दंडित करने की प्रक्रिया अपनानी चाहिए। – दिशा सामाजिक संस्था के सचिव सुशील विरमानी व उपाध्यक्ष प्रभात डंडरियाल
