जनता कर्फ्यू के दिन भी पहाड़ में आज जारी है धरना, जाने कहा
अल्मोड़ा । एस0एस0बी स्वयं सेवक कल्याण समिति का नौकरी पैशन एवं अन्य सुविधाओ को दिये जाने की मांग को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय के प्रागण मे दिया जा रहा धरना आज 3798 वे दिन भी जारी रहा।इस अवसर पर जारी विज्ञप्ति मे कहा गया है कि जनता कर्फ्यू के प्रधानमन्त्री जी के आहवान के बाबजूद भी धरना जारी रखने का एक प्रमुख कारण यह है कि इतने लम्बे धरने की निरन्तरता के क्रम को संगठन तोडना नही चाहता था दूसरा कारण यह है कि चाहे कोई भी परिस्थिति हो हम किसी न किसी स्तर पर आन्दोलन को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है जनता कर्फ्यू के आहवान के बाबजूद धरना इसलिये भी जारी रखा गया कि गुर्रिल्ले विगत 14 वर्षो से आन्दोलनरत है लेकिन सीमा की सुरक्षा से जुडी इस महत्वपूर्ण मांग के प्रति सरकार के उपेक्षित रवैये से वे आहत है इस बात को वे सरकार तक शांतिपूर्ण तरीके से कर्फ्यू के आहवान का उल्लंघन कर सरकार तक अपनी बात पहुचाना चाहते है गुर्रिल्लो ने विज्ञप्ति मे यह भी कहा है कि जिस प्रकार सरकार कोरोना वायरस के प्रति तुरन्त संवेदनशील होकर कार्यवाही कर रही है उसी प्रकार सीमा सुरक्षा से जुडी हमारी मांगो के प्रति भी सरकार को संवेदनशील होने की आवश्यकता है विज्ञप्ति मे यह भी कहा गया है कि सन् 1963 मे एस0एस0बी की स्थापना के बाद देश की अन्तर्राष्ट्रीय सीमाओ मे देश भक्ति की भावना जगाने वहा के नागरिको को देश के प्रति समर्पित बनाने खुपिया सूचना जुटाने आवश्यकतानुसार बाहय व आन्तरिक सुरक्षा व्यवस्था मे गुर्रिल्लो ने जो महत्वपूर्ण योगदान दिया है उसके लिये उन्हें कुछ प्रोत्साहन दिया जाना तो जरूरी है ही उससे ज्यादा जरूरी ये है कि अन्तर्राष्ट्रीय सीमाओ से हो रही आंकवादी घुसपैठ नशीले पदार्थो की आवक अन्य पदार्थो की तस्करी विदेशी नागरिको की घुसपैठ को रोकने के लिये पुरानी गुर्रिल्लायुक्त खुपिया सुरक्षा प्रणाली सीमाओ पर बहाल कर इन समस्याओ का समाधान किया जाय पर विगत 14 वर्षो के आन्दोलन के दौरान केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा जो भी घोषणाएं गुर्रिल्लो के सम्बन्ध मे की गयी तथा जो निर्णय लिये गये उनका अनुपालन स्वंय सरकारो ने ही नही किया ये एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है जिसके कारण भी हम आज के दिन भी धरना जारी रखने को बाध्य हुए है धरने मे केन्द्रीय अध्यक्ष ब्रहमानंद डालाकोटी जिलाध्यक्ष शिवराज बनौला जगदीश सिंह सुयाल उदय महरा आनन्दी महरा धनी आर्या आदि लोग बैठे।
