March 27, 2026

शहीद वेतन भोगी कर्मी के पुत्र को वन विभाग में मिली स्थाई नियुक्ति

काशीपुर। जंगल की रक्षा करते हुए शहीद हुए दैनिक वेतनभोगी के बेटे को वन विभाग में फॉरेस्ट गार्ड के तौर पर स्थाई नौकरी दी गयी है। तराई केंद्रीय प्रभाग की डीएफओ ने शहीद के बेटे को वर्दी सौंपी और वर्दी पर विभाग की नेमप्लेट लगाकर विभाग में शामिल किया। अधिकारियों के अनुसार मृतक दैनिक वेतनभोगी कर्मी के आश्रित को विभाग में स्थाई नौकरी देने का प्रदेश में यह पहला मामला है। 21 जून 2019 की रात बरहैनी रेंज के मौला क्षेत्र में खैर लकड़ी की तस्करी की सूचना पर वन विभाग की टीम पहुंची थी। टीम में दैनिक वेतनभोगी बीटवाचर बहादुर सिंह चौहान भी थे। तस्करों के साथ मुठभेड़ में बहादुर सिंह चौहान की गोली लगने से मौत हो गयी थी, जबकि एक अन्य साथी महेंद्र सिंह घायल हुये थे। सोमवार को शहीद चौहान की पहली बरसी पर बरहैनी स्थित नर्सरी में उनके बेटे दीपक चौहान को वन विभाग में बतौर फॉरेस्ट गार्ड स्थाई नियुक्ति दी गयी। नर्सरी में आयोजित कार्यक्रम में तराई वन प्रभाग की डीएफओ डॉ. अभिलाषा सिंह ने शहीद चौहान की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किये। इसके बाद उन्होंने दीपक को वर्दी सौंपी और बाद में दीपक की वर्दी पर बतौर विभागीय कर्मी नेमप्लेट भी लगायी। डीएफओ ने उमीद जतायी कि दीपक भी अपने पिता की तरह जिमेदारी और बहादुरी से वनों की रक्षा करेंगे। डीएफओ ने शहीद की पत्नी डॉली देवी का भी समान किया। उधर, रेंजर आरएन गौतम ने बताया कि प्रदेश में पहली बार किसी दैनिक वेतनभोगी कर्मी के शहीद होने पर उनके परिजन को स्थाई नियुक्ति दी गयी है।बरहैनी रेंजर आरएन गौतम, रुद्रपुर रेंजर पंकज कुमार शर्मा, गदगदिया रेंजर प्रदीप कुमार असगोला, भाखड़ा रेंजर सावित्री गिरी, टांडा रेंजर अजय लिंगवाल, समाजसेवी वीरेंद्र बिष्ट, डॉ. मोहन पांडे आदि मौजूद रहे।
शहीद के नाम पर बनायी गयी है नर्सरी
सोमवार को बरहैनी रेंज की जिस नर्सरी में कार्यक्रम का आयोजन हुआ, उस नर्सरी का नाम भी शहीद बहादुर सिंह चौहान के नाम पर रखा गया है। शहीद के समान में वन विभाग ने पिछले साल ही यह फैसला कर लिया था। बता दें कि फायरिंग के आरोपी लखविंदर सिंह, करन सिंह, पमू और सूरज को पुलिस ने कुछ दिन बाद गिरतार कर लिया था। इनमें से सूरज जमानत पर बाहर है, जबकि बाकी तीनों अब भी जेल में हैं।