January 30, 2026

उत्तराखंड में कोरोना की रफ़्तार फिर हुई तेज

देहरादून। देश के कई अन्य रायों की तरह ही उत्तराखंड में भी कोरोना की रतार फिर तेज होने लगी है। प्रदेश में कोरोना का 37 वां हता (22-28 नवंबर) पूरा होने पर जो तस्वीर सामने आई है, वह बढ़ते खतरे की ओर इशारा कर रही है। इस दरमियान संक्रमितों का साप्ताहिक आंकड़ा छह हतों में सर्वाधिक रहा है। यही नहीं छह हतों में सर्वाधिक मौत भी इसी दरमियान हुई हैं। इधर, एक्टिव केस में बढ़त के साथ ही सिस्टम की बेचैनी भी अब बढ़ रही है। सितंबर माह में उत्तराखंड में कोरोना के रिकॉर्ड मामले आए, पर अक्टूबर में संक्रमण की रतार कुछ मंद पड़ गई। नवंबर का शुरुआती पखवाड़ा भी सुकून में बीता, लेकिन अब एकाएक मामले बढऩे लगे हैं। कोरोना के आंकड़ों का अध्ययन कर रही संस्था सोशल डेवलपमेंट फॉर कयुनिटी फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल का कहना है कि सॢदयों का समय वायरस के प्रसार के लिए बहुत उपयुक्त होता है। यही नहीं, मास्क, सैनिटाइजेशन व शारीरिक दूरी को लेकर जिस तरह की लापरवाही अब बरती जा रही है, उससे भी खतरा कई गुना बढ़ गया है। दिल्ली व अन्य रायों में बढ़ रहे संक्रमण ने भी उत्तराखंड के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है। भूलना नहीं चाहिए कि पूर्व में भी प्रवासियों के लौटने से राय में बड़े स्तर पर संक्रमण फैला था। यहां यह समझने की जरूरत है कि कोरोना के खिलाफ इस जंग में आपका रवैया भी बहुत अहमियत रखता है। जब तक जनता का सहयोग नहीं मिलेगा, सारी नीतियां और कदम बेकार हैं। ऐसे में खुद के लिए, परिवार के लिए और समाज के लिए पूरी सतर्कता बरतें।
जांच ने फिर पकड़ी रतार: कोरोना के लिहाज से सिस्टम भी फिर एक बार अलर्ट मोड पर दिख रहा है। दिल्ली व अन्य रायों से आने वाले लोगों की बॉर्डर पर रैंडम सैंपलिंग की जा रही है। इसके अलावा बस अड्डे, रेलवे स्टेशन व हवाई अड्डे पर भी अब नियमित सैंपलिंग की जा रही है। इसी का असर है कि टेस्ंिटग का आंकड़ा फिर बढऩे लगा है। 36 वें हते जहां यह आंकड़ा 64 हजार पर पहुंच गया था, अब यह बढ़कर 80 हजार के करीब आ गया है। जांच के मोर्चे पर चिंता सिर्फ इस बात की है कि बैकलॉग बढ़ता जा रहा है। फिलवक्त साढ़े तेरह हजार से अधिक सैंपल की जांच रिपोर्ट आनी बाकी है।