July 24, 2024

किसान सभा ने किया वन संरक्षण अधिनियम संसोधन विधेयक का विरोध


रुद्रप्रयाग। किसान सभा ने केंद्र सरकार के वन संरक्षण अधिनियम संसोधन विधेयक 2023 को प्रतिरोध दिवस के रूप में मनाया। इस मौके पर आरोप लगाया गया कि केंद्र सरकार ग्राम एवं वन पंचायतों के साथ ही कई पीढ़ियों से जंगलों में रह रहे वनवासियों के अधिकारों को खत्म कर रही है। मुख्यालय स्थित पोदार धर्मशाला में किसान सभा के जिलाध्यक्ष अषाड़ सिंह धिरवाण की अध्यक्षता में आयोजित गोष्ठी में वन संरक्षण अधिनियम संसोधन विधेयक को लेकर गहन चर्चा की गई। साथ ही इसे ग्राम एवं वन पंचायतों के खिलाफ बताया। इस दौरान मुख्य वक्ता किसान सभा के प्रांतीय महामंत्री गंगाधर नौटियाल ने कहा कि आज देश फिर गुलामी के कगार पर पहुंच गया है। कहा कि देश में पूंजीपति और भी पूंजीपति बनते जा रहे हैं, उनकी आय में लगातार इजाफा हो रहा है जबकि आर्थिक कमजोर लोग और भी बुरी स्थिति में है। सरकार का ध्यान महज अडानी जैसे पूंजीपतियों पर है।
कहा कि वर्ष 1996 में पंचायत क्षेत्राधिकार अधिनियम बनाया गया था। इस कानून में व्यवस्था थी कि ग्राम पंचायत और वन पंचायत के अधीन जो भी जल, जंगल, जमीन होगी, उस संपत्ति को अधिग्रहण करने एवं उस संपत्ति पर कोई निर्माण के लिए ग्राम पंचायत वन पंचायत की अनुमति के बिना निर्माण नहीं हो सकता था किंतु केंद्र की मोदी सरकार इसको खत्म कर रही है। गांव की जनता को उजाड़ रही है। इसलिए देश में किसान आज के दिन प्रतिरोध दिवस मना रहे हैं। कहा कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए बनाए गए सभी कानूनों को यह सरकार पूरी तरह खत्म करना चाह रही है। कहा कि वनाधिकार कानून में यह व्यवस्था है वनों में रहने वाले बनवासी कई पीढ़ियों से जंगलों में रहते हैं इसलिए उन्हें वनों से संबंधित सारे अधिकार मिलना तय था किंतु इस सरकार द्वारा इस कानून को भी खत्म किया जा रहा है। कहा कि आज पूरे देश में सभी जनवादी संगठन केंद्र की जनविरोधी नीतियों एवं जनता को बेदखल करने के खिलाफ प्रतिरोध दिवस मना रही है।
इस मौके पर किसान सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष राजाराम सेमवाल, सीटू के जिला महामंत्री वीरेंद्र गोस्वामी, किसान सभा के पूर्व जिला अध्यक्ष दौलत सिंह रावत, सीटू जिला कोषाध्यक्ष नरेंद्र रावत, जनवादी महिला समिति की जिला अध्यक्ष भावना देवी, विक्रम लाल, इंद्र लाल, सुंदर सिंह राणा, हुकम सिंह राणा, रमेश लाल, बलवंत लाल, गोविंद लाल, नारायण देई, कुंवर सिंह आदि मौजूद थे।