समयबद्ध न्याय से रूक सकेंगे महिलाओं के प्रति अपराध
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। देश का एक भी कोना, स्त्रियों के साथ अमानवीयता को लेकर अछूता नहीं है। हर रोज देश के किसी न किसी कोने से महिलाओं-बच्चियों के साथ दुष्कर्म और हत्या जैसी घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे में यह प्रश्न उठाना स्वाभाविक है कि आखिर किस मानसिकता के साथ ऐसे घृणित कृत्य को अंजाम दिया जाता है। यदि हम गहराई में जाएं, तो पायेंगे कि इस तरह के कुकृत्यों के पीछे एक ऐसी मानसिकता काम करती है, जो महिलाओं, बच्चियों को मनुष्य न मान महज एक वस्तु मानती है। ऐसी मानसिकता के विकसित होने का कारण देश में एक भी ऐसी संस्था का न होना है, जो नौजवानों का मार्गदर्शन कर सके। इसके अतिरिक्त, देश में यौन शिक्षा को लेकर, यौन संबंधों को लेकर विमर्श में एक हिचकिचाहट है।
समाज में इन विषयों पर बातचीत करना एक तरह से प्रतिबंधित है। ऐसे में यौन संबंधों के बारे में छुप-छुपाकर जानकारी प्राप्त की जाती है। इससे एक विकृत मानसिकता विकसित होती है। आजकल स्मार्टफोन व इंटरनेट की पहुंच लगभग हर जगह हो गयी है। और इनके जरिये बड़ी मात्रा में अश्लील सामग्री किशोरों, युवाओं व बच्चों तक पहुंच रही है। इन सामग्रियों पर किसी तरह की कोई रोक भी नहीं है। इस तरह की सामग्री नौजवानों को अपराध के लिए उकसाती है। जब युवाओं के पास यौन संबंधों को लेकर कोई खास जानकारी नहीं है, न ही इस विषय पर कोई विमर्श ही होता है, ऐसा वातावरण अपराध की मानसिकता विकसित करने में मददगार साबित होता है। जिनके पास पैसा है, वे पैसे के बल पर इस तरह के कार्य कर लेते हैं। पर जिनके पास पैसा नहीं है, न ही उसे अपनी इच्छाएं पूरी करने का रास्ता पता है, ऐसा व्यक्ति चोरी-छुपे इस तरह के काम करता है। इसके लिए वह अपराध का रास्ता चुनता है। चूंकि महिलाएं शारीरिक रूप से कमजोर होती हैं, बच्चियां तो प्रतिरोध की स्थिति में ही नहीं होती हैं, सो अपराधियों के लिए उनको निशाना बनाना आसान हो जाता है।
और अपने लिए सुरक्षित वातावरण के निर्माण के लिए एकजुट होकर आवाज उठानी होगी, अपराधियों को सजा दिलवानी होगी। आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का सिक्का जमा रही हैं, परंतु उनके लिए बाहरी वातावरण सिकुड़ता जा रहा है, क्योंकि उनके लिए असुरक्षा बनी हुई है। यूनिवर्सिटी, कॉलेज महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण निर्मित करे, पुलिस अपराधियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करे, समय पर न्याय मिले। जब ऐसा होगा, तब जाकर महिलाओं के प्रति अपराध रुकेंगे और वे सुरक्षित हो पायेंगी।
