वन महोत्सव में प्रकृति प्रेम की मिसाल: बागेश्वर में धारा बचाओ कार्यक्रम के तहत हुआ पौधरोपण, पर्यावरण संरक्षकों को भेंट किए गए दुर्लभ पौधे
बागेश्वर । जिले में वन महोत्सव के अंतर्गत “नदी, नौलौं, धारा बचाओ” कार्यक्रम के तहत प्रकृति संरक्षण का एक प्रभावशाली आयोजन किया गया। इस अवसर पर मांग धारा के आस-पास सिलिंग और जामुन के पौधों का रोपड़ कर हरियाली को बढ़ावा दिया गया। देवकी लघु वाटिका की ओर से पर्यावरण प्रेमियों के सहयोग से यह कार्यक्रम न केवल पौधरोपण तक सीमित रहा, बल्कि स्थानीय जलस्रोतों के संरक्षण का भी संदेश लेकर आया।
इस आयोजन में अल्मोड़ा, कपकोट, गरुड़, बनलेख, कांडा, दफोट आदि क्षेत्रों से आए पर्यावरण संरक्षकों को बांस, जामुन, सिलिंग, चंदन, परिजात, च्यूरा, लोकाट, रोजमेरी, नींबू जैसी पौधों की प्रजातियाँ भेंट की गईं। इन दुर्लभ और औषधीय पौधों के वितरण का उद्देश्य न केवल हरियाली बढ़ाना है, बल्कि स्थानीय जैवविविधता को पुनर्जीवित करना भी है।
कार्यक्रम में हरीश चंद्र पांडेय, शैलेंद्र सिंह, पवन सुप्याल, भगवत सुप्याल, रमेश पर्वतीय, विजय परिहार, भानु गड़िया, प्रशांत सिंह, शंकर राम, शेर सिंह थापा, भजन सिंह मलड़ा, मोहन जोशी, हेमंत बोरा, खीम सिंह कनवाल, हरक सिंह, भगवान सिंह, विजय सिंह दफौटी आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे और सहयोग प्रदान किया।
कार्यक्रम के समापन पर किशन मलड़ा ने पूर्व में लगाए गए पौधों की स्थिति पर संतोष जताते हुए सभी पर्यावरण प्रेमियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपील की कि प्रत्येक नागरिक को अपने रोपित पौधों की देखरेख उसी भाव से करनी चाहिए जैसे वह अपने बच्चों की करते हैं, तभी वन महोत्सव का असली उद्देश्य सफल हो सकेगा।
