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November 7, 2026

बागेश्वर में असम के वैज्ञानिकों ने देखी मूंगा रेशम की खेती


बागेश्वर।  असम के वैज्ञानिकों ने देवकी लघु वाटिका में मूंगा रेशम की खेती का अवलोकन किया गया, वैज्ञानिकों के दल ने सराहना करते हुए उत्तराखंड के लिए इसे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ रोजगार के लिए भी लाभकारी बताया। दल ने कपकोट का भी भ्रमण कर किसानों को अनेक जानकारी मूंगा रेशम की दी और बताया कि मूंगा रेशम सबसे कीमती होने के साथ ही आसाम का जीआई टैग प्राप्त है। किशन सिंह मलड़ा ने मूंगा रेशम की खेती के बारे में बताया एवं अपनाने की अपील करते हुए सभी मूंगा रेशम से जुड़े किसानों का धन्यवावद किया तथा मूंगा रेशम के साथ हल्दी, कपूर कचरि, अदरक, गडेरी, पिनालु, अरबी प्रजाती, लेमन ग्रास, ऐलोबरा, रोजमैरि आदि संयुक्त फसलों के उत्पादन को आसाम में भी अपनाने की सहमति जताई। बागेश्वर उत्तराखंड मूंगा रेशम के क्षेत्र में उत्तर पूर्व भारत के लिए एक बीज क्षेत्र बनने की बात बैज्ञानिकों ने कही। वाटिका में देवकी देवी ने पुष्प गुच्छ भेंट कर बैज्ञानिकों का स्वागत किया। उन्होंने हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। इस मौके पर वृक्ष पुरुष किशन सिंह मलड़ा, डॉ. विजय एन, डॉ. पुलक राभा, डॉ. विक्रम कुमार, बृजेश रतूड़ी, प्रभारी निरीक्षक रेशम बागेश्वर कमलेश कुमार, निरीक्षक आदि मौजूद रहे।

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