उत्तराखंड में स्कूल मर्ज करने की नीति तत्काल बंद हो :आर्य
हल्द्वानी । नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि उत्तराखंड में सरकारी विद्यालयों को मर्ज करना अथवा बंद करने का निर्णय न सिर्फ शिक्षा विरोधी है, बल्कि यह शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की मूल भावना का खुला उल्लंघन है। शुक्रवार को प्रेस को जारी बयान में उन्होंने सरकार से इस मर्जर नीति को तत्काल प्रभाव से रोकने, हर गांव में संविधान और आरटीई एक्ट के अनुसार स्थानीय स्कूल की गारंटी, शिक्षा में निजीकरण और केंद्रीकरण के बजाय जन-भागीदारी और विकेंद्रीकरण को बढ़ावा देने की मांग की है। आर्य ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में क्लस्टर स्कूल की अवधारणा को स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता और संसाधनों के समुचित उपयोग को बढ़ाने के लिए प्रस्तावित किया गया है, लेकिन इसके अंतर्गत कही भी स्कूलों के विलय-समायोजन या बंद करने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने उत्तराखंड सरकार के उस निर्णय पर आपत्ति जताई, जिसमें कहा गया है कि कम छात्र संख्या वाले छोटे विद्यालयों को पास के बड़े विद्यालयों में मर्ज कर दिया जाए। कहा कि इस आदेश में ‘शैक्षिक गुणवत्ता, ‘संसाधनों का समुचित उपयोग जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अनुच्छेद 21 उन सभी बच्चों को 6 से 14 वर्ष की आयु में नि:शुल्क व अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है, जिसे आरटीई एक्ट 2009 की धारा 6 में स्पष्ट किया गया है कि हर बस्ती के पास स्कूल होना राज्य की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार जिस प्रकार यह योजना लागू कर रही है उससे बड़ी तादाद मे विद्यालय बंद हो जाएंगे। ऐसे आदेश निश्चित रूप से ग्रामीण जनों में शिक्षा को लेकर अरुचि और शिक्षा को गांव से दूर ले जाएंगे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण आंचलिक क्षेत्रों में शराब की दुकानों में वृद्धि और स्कूलों की संख्या में गिरावट का फैसला कतई न्याय संगत नहीं होगा। इस फैसले से न सिर्फ सैकड़ों स्कूल बंद हो सकते हैं, बल्कि शिक्षकों-प्रधानाचार्य-प्रधानाध्यापक व शिक्षणेत्तर कर्मियों के पद भी खत्म हो जाएंगे।
