April 26, 2026

भू-बैकुंठ के द्वार खुले, आस्था के सागर में डूबा बद्रीनाथ धाम — विधि-विधान संग शुरू हुई दिव्य यात्रा

चमोली । धरती का स्वर्ग कहे जाने वाला बद्रीनाथ धाम आज अलौकिक आस्था और दिव्यता के अद्वितीय संगम का साक्षी बना, जब प्रातः 6:15 बजे वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच भगवान बद्री विशाल के कपाट ग्रीष्मकालीन दर्शन हेतु विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। हिमालय की गोद में बसे इस पवित्र धाम में कपाट खुलते ही श्रद्धा का ऐसा ज्वार उमड़ा, मानो सम्पूर्ण सनातन आस्था एक ही केंद्र में सिमट आई हो।
कपाट उद्घाटन के ऐतिहासिक क्षणों को साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से आए लगभग 10 हजार से अधिक श्रद्धालु प्रातः काल से ही मंदिर परिसर में एकत्रित हो गए थे। जैसे ही द्वार खुले, “जय बद्री विशाल” के गगनभेदी उद्घोषों से समूचा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं की आंखों में आस्था, विश्वास और भावनाओं का अद्भुत संगम स्पष्ट रूप से झलक रहा था।
इस वर्ष मंदिर के सिंह द्वार को रंग-बिरंगे गेंदे के फूलों से अत्यंत भव्य और आकर्षक ढंग से सजाया गया था। फूलों की इस मनोहारी सजावट ने धाम की दिव्यता को और भी प्रखर बना दिया, जिससे नारायण धाम दूर से ही स्वर्ण और रजत आभा से दमकता हुआ प्रतीत हो रहा था। प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा का यह अद्वितीय समागम श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन गया।
कपाट खुलने के साथ ही अब आगामी छह महीनों तक बद्रीनाथ धाम में पूजा-अर्चना और दर्शन की यह पावन यात्रा निरंतर जारी रहेगी, जिससे उत्तराखंड की धार्मिक पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।