January 30, 2026

आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर दोषी करार, 300 करोड़ के लोन के बदले ली थी 64 करोड़ की रिश्वत


नई दिल्ली। । आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर चंदा कोचर को वीडियोकॉन समूह को लोन देने के बदले में रिश्वत लेने का दोषी पाया गया है। एक अपीलीय न्यायाधिकरण ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि चंदा कोचर को वीडियोकॉन समूह को 300 करोड़ रुपये का लोन पास करने के एवज में 64 करोड़ रुपये की घूस मिली थी।
प्रवर्तन निदेशालय के मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायाधिकरण ने 3 जुलाई को दिए अपने आदेश में कहा कि यह क्तह्वद्बस्र क्कह्म्श क्तह्वश यानी ‘कुछ के बदले कुछÓ का एक साफ मामला है। फैसले के अनुसार, लोन की रकम मंजूर होने के ठीक अगले ही दिन वीडियोकॉन से जुड़ी एक कंपनी ने यह पैसा चंदा कोचर के पति दीपक कोचर द्वारा नियंत्रित कंपनी में ट्रांसफर किया था।
न्यायाधिकरण ने ईडी के उन दावों पर मुहर लगा दी, जिनमें कहा गया था कि चंदा कोचर ने बैंक के आंतरिक नियमों और हितों के टकराव की नीति का उल्लंघन करते हुए यह लोन पास किया था। उन्होंने वीडियोकॉन के साथ अपने पति दीपक कोचर के व्यावसायिक संबंधों का खुलासा नहीं किया था।
जांच के अनुसार, जैसे ही आईसीआईसीआई बैंक ने वीडियोकॉन को 300 करोड़ रुपये का लोन जारी किया, उसके अगले ही दिन वीडियोकॉन की कंपनी स्श्वक्करु से 64 करोड़ रुपये दीपक कोचर की कंपनी एनआरपीएल (हृक्रक्करु) को ट्रांसफर कर दिए गए। दस्तावेजों में एनआरपीएल का नियंत्रण वीडियोकॉन के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत के पास दिखाया गया था, लेकिन इसका वास्तविक नियंत्रण और प्रबंधन दीपक कोचर के ही हाथों में था। न्यायाधिकरण ने इस सीधे लेन-देन को रिश्वत का अकाट्य सबूत माना।
इस महत्वपूर्ण फैसले में, अपीलीय न्यायाधिकरण ने 2020 के उस फैसले को भी खारिज कर दिया, जिसमें एक निचली अथॉरिटी ने चंदा कोचर, उनके पति और अन्य सहयोगियों की 78 करोड़ रुपये की संपत्ति को रिलीज करने का आदेश दिया था। न्यायाधिकरण ने कहा कि निचली अथॉरिटी ने ईडी द्वारा पेश किए गए महत्वपूर्ण सबूतों को नजरअंदाज किया और एक गलत निष्कर्ष पर पहुंची थी।
न्यायाधिकरण ने जोर देकर कहा कि लोन की मंजूरी, अगले ही दिन पैसे का ट्रांसफर और दीपक कोचर की कंपनी में फंड का आना, यह पूरी श्रृंखला स्पष्ट रूप से चंदा कोचर द्वारा अपने पद के दुरुपयोग और नैतिक उल्लंघन को दर्शाती है।

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