जीभ काट लो देशद्रोही की भाषा जिसने बोली है….
रुद्रपुर, ( आखरीआंख ) जिला स्टेडियम में स्प्रिंग कार्निवल के तहत जिला प्रशासन की ओर से कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें आये कवियों ने वीर रस की कविताओं से दर्शकों में जोश भर दिया। कवियों ने एक ओर जहां देश के वीर जवानों की शहादत को सलाम किया वहीं पाकिस्तान और आतंकवादियों को खुली चुनौती देते हुए उन पर जमकर प्रहार किये और देश को एकजुटता का संदेश देते हुए आतंकवाद के खात्मे का संदेश दिया। कवि सम्मेलन का शुभारम्भ विधाय राजकुमार ठुकराल, जिलाधिकारी नीरज खैरवाल, गुरूद्वारा सिंह सभा कमेटी के पूर्व अध्यक्ष जसविन्दर खरबंदा लक्की, प्रसिद्ध उद्योगपति शिव कुमार बंसल ने मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रवज्जवलित कर किया। कवियत्री प्रियंका राय ने कवि सम्मेलन की शुरूआत करते हुए अपनी रचना पढ़ी। उन्होंने ‘बोलो जय भारत माता उसके आनबान की जय’‘जब भी नरसंहार बढ़ेगा हम हिन्दुस्तानी जागेंगे’ ‘भारत मां मान बढ़ाऊ यही सिखाया मां ने वंदे मातरम हंस कर गाऊ यही सिखाया मां ने, जब भी कोई अपने देश पर आंख उठाये कमल को तलवार बनाऊ यही सिखाया मां ने’ कवि सुदीप भोला ने कहा कि ‘जोड़ती रही वतन उड़ा के अपनी
धज्जियां, वर्दियां वर्दियां ये वर्दियां’ देश के प्रसिद्ध कवि प्रताप फौजदार ने कहा ‘मैने पूछा झूमझूम फांसी कैसे चढ़ जाते थे नंगे पैर दहकते अंगारों पर बढ़ जाते थे, सहमे तक तुम नहीं कभी हिम मुक्त जवानी देने में, क्यों तुमको डर नहीं लगा अपनी कुर्बानी देने में, बोले देश भक्ति लौ पर बलिदान पतंगा होता है, मृत्यु का भय नहीं लगता जब हाथ तिरंगा होेता है’ ‘एलओसी वैलओसी कुछ नहीं खुली छूट दो सेना को, जब चाहे जैसे मारे ये खुली छूट दो सेना को, आतंकवाद न मिट जाये तो मेरी मूंछ मूंड लेना, दूरबीन हाथ में दे दुंगा पाकिस्तान ढूंढ लेना’। राजस्थान से आये वीरर रस के कवि योगेन्द्र शर्मा ने अपनी रचनाएं सुनाकर वहां मौजूद दर्शकों में जोश और उत्साह भर दिया। उन्होंने ‘एक शीश के बदले दस हमने काटे होते, इन पत्थरबाजों के हाथ गर हमने काटे होते, दो चार दरिंदो की लालकिले पर फांसी हो जाती तो लालकिले में घुसने की हिम्मत इनमें नहीं हो पाती’ ‘दुश्मन के दुस्साहस का सर अंजाम जरूरी है लेकिन घर में गद्दारों का काम तमाम जरूरी है’ ‘घोर तबाही का हो मंचर अब और झूंड नहीं चाहिए, पुलवामा के बदले कई हजारों नरमुंड चाहिए’ ‘आस्तीन में सांप पालना अब हमको स्वीकार नहीं, इस धरती पर गद्दारों को जीने का अधिकार नहीं’ ‘जीभ काट लो देशद्रोही की भाषा जिसने बोली है, दहशतगर्दो के सीने में हर गोली है’ ‘टीवी मोबाइल की सेवाएं सात दिन तक जाम करो, खुली छूट देकर सेना को बोलो खुलकर कत्लेआम करो’। हरियाणा से आये कवि सुनील साहिल ने कहा कि ‘बेशक मेरी देह में दम नहीं, मगर देश पर मरने का जजबा आप से कम नहीं’। कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे कवि प्रवीण शुक्ला ने कहा ‘प्रण करते हैं कि आजादी की शाम नहीं होने देंगे, जब तक आतंकवाद का काम तमाम नहीं होने देंगे’ समेत अपनी रचनाओं सेे समां बांधा। इस दौरान एडीएम उत्तम सिंह चैहान, जगदीश चंद्र कांडपाल,एसएलओ एनएस नबियाल, सीडीओ मयूर दीक्षित, एसडीएम युक्ता मिश्रा, उत्तम दत्ता, कोमल ठुकराल, अजय तिवारी, संजय ठुकराल, चंद्रसेन कोली, नीलकंठ राणा, राजन राठौर, आनन्द बिष्ट, बंटी कोली, घनश्याम अग्रवाल, विवेक सक्सेना, विपिन लूथरा, कमलेंद्र सेमवाल, पंकज बांगा, विक्की आहूजा, सुनील झाम, आशू मिड्डा, आकाश अरोरा समेत तमाम लोग मौैजूद थे।
