March 17, 2026

बागेश्वर से प्रेरणादायक पहल: युवा संगीतकार अर्जुन गढ़िया ने शुरू किया कम खर्च वाला संगीत विद्यालय, पहाड़ी संस्कृति को दिया नया सुर

बागेश्वर। पहाड़ की मिट्टी में जन्मे और संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुके युवा संगीतकार अर्जुन गढ़िया ने अब अपने गांव मण्डलसेरा (बागेश्वर) से एक नई सांस्कृतिक क्रांति की शुरुआत की है। टी-सीरीज़ जैसी नामी संगीत कंपनी में वर्षों तक काम कर चुके अर्जुन गढ़िया ने पहाड़ लौटकर कम खर्च में संगीत विद्यालय शुरू करने का संकल्प लिया है। उनका उद्देश्य है—उन प्रतिभाशाली युवाओं को मंच देना, जिनमें हुनर तो है, पर अवसरों की कमी है।

अर्जुन गढ़िया का कहना है कि उनका सपना है, “पहाड़ के बच्चे अपने गीत, अपनी भाषा और अपने सुरों से दुनिया तक पहुंचे।” उन्होंने बताया कि यह विद्यालय न सिर्फ संगीत सिखाने का केंद्र होगा, बल्कि पहाड़ी संस्कृति और परंपराओं को सहेजने का भी माध्यम बनेगा।

विद्यालय के उद्घाटन समारोह में क्षेत्र के सम्मानित समाजसेवी किशन सिंह मलड़ा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अर्जुन गढ़िया के इस प्रयास को “युवा शक्ति और पहाड़ी संस्कृति के संगम की मिसाल” बताया।

समारोह का सबसे आकर्षक पल तब आया जब अर्जुन गढ़िया ने स्वयं अपने प्रिय गीत ‘बेडों पाको बारोबासा’ को नए अंदाज में प्रस्तुत किया।
गीत के पारंपरिक बोलों में ‘बीड़ी’ शब्द की जगह उन्होंने बदलाव करते हुए इसे इस तरह गाया—

“आपु खानी पान सुपारी, मैकें दिनी सिख मेरी छैला।”

इस छोटे से बदलाव ने बड़ा संदेश दिया—नशा मुक्त समाज की ओर कदम।
उन्होंने कहा, “जब समाज नशा मुक्त भारत की बात करता है, तो हमारे गीतों को भी इस दिशा में सकारात्मक संदेश देना चाहिए।

उद्घाटन के दौरान मौजूद युवाओं और संगीत प्रेमियों ने भी “न नशा, न नशे की बात” के संकल्प को दोहराया।
अर्जुन गढ़िया ने बताया कि संगीत विद्यालय में गीत-संगीत के साथ-साथ युवाओं को सामाजिक जागरूकता, अनुशासन और सांस्कृतिक पहचान का भी पाठ पढ़ाया जाएगा।

समारोह में भवान सिंह गढ़िया, पुरन सिंह, कैलाश मलड़ा, दीपक जोशी, मनोज टंगनिया, नीतु, बिना परिहार, भास्कर चंदोला, रमेश लाल, रमेश प्रकाश पर्वतीय (संस्कृति कर्मी) सहित कई स्थानीय कलाकार और संगीत प्रेमी उपस्थित रहे।
सभी ने अर्जुन गढ़िया की इस पहल को “पहाड़ के युवाओं के लिए नई रोशनी” बताया और उनके प्रयास को सराहा ।

अर्जुन गढ़िया की यह पहल न केवल संगीत के क्षेत्र में नए अवसर खोलेगी, बल्कि पहाड़ के युवाओं को अपनी जड़ों, अपनी बोली और अपनी संस्कृति से जोड़ने का काम करेगी।
उनका यह कदम इस बात का प्रमाण है कि अगर संकल्प सच्चा हो, तो सफलता केवल मंचों पर नहीं, समाज के दिलों में गूंजती है।