January 29, 2026

देवप्रयाग में गुलदार दिखने से लोगों में दहशत


 नई टिहरी ।  क्षेत्र में गुलदार की दहशत कम नहीं हो रही है। गुलदार दिन दहाड़े यहां मुनेठ गांव स्थित एक स्कूल के निकट आकर बैठ गया, जिससे यहां बच्चों व शिक्षकों में दशहत बन गई। वहीं बीती देर शाम गाय का पीछा करते गुलदार सीएचसी बागी के भीतर घुस आया, जिससे यहां मौजूद स्टाफ व मरीजों में हड़कंप बन गया। वहीं पालीसैण गांव में शाम को घर लौट रहे तहसील कर्मी की बाइक के सामने गुलदार के आ जाने से उसने सड़क से लगे मकान में दौड़कर किसी तरह जान बचाई। देवप्रयाग के निकटवर्ती क्षेत्रों में गुलदार की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। यहां मुनेठ गांव में गुलदार दिन दहाड़े दिवाकर सिंह की घर के छत पर चौक में बंधी बकरियों की ताक में बैठ गया। उसे देख घर के लोगों ने शोर मचाया तो वह पास की स्कूल के पीछे एक पेड़ के नीचे बैठ गया। पक्षियों के भारी शोर करने पर जब शिक्षिका सरोज बिष्ट यहां बाहर आई तो गुलदार को स्कूल के पीछे बैठा देख वह सहम गई। शोर सुनकर गुलदार निकट के जंगल में भाग निकला। स्कूल में उस समय करीब 18 बच्चे मौजूद थे। गुलदार के दिन में ही आ धमकने की घटना ने यहां अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। वहीं बीती गुरुवार शाम करीब साढ़े आठ बजे गाय का पीछा करते गुलदार सीएचसी के भीतर बने आंगन तक आ गया। सीएचसी प्रभारी डॉ अंजना गुप्ता के अनुसार उस समय यहां भर्ती मरीजों का इलाज चल रहा था। स्टाफ के लगातार शोर मचाने पर गुलदार किसी तरह यहां से निकला। बीती बरसात में सीएचसी के पीछे ध्वस्त पुश्ते के नहीं बनने से गुलदार की यहां पहुंच आसान बनी है। सीएचसी के भीतर गुलदार के आ घुसने की संभावना से यहां सभी दरवाजों को शाम से ही बंद करने की नौबत बन गई है। वहीं बीती शाम बाइक से घर लौट रहे पालीसैण निवासी तहसील कर्मी ललित सिंह का सामना घर के पास ही गुलदार से हो गया। कुछ ही फासले पर खड़े गुलदार से बचने के लिए ललित ने बाइक की लाइट जलाए रख उसे पीछे किया और फिर बाइक से उतरकर सड़क से लगे अनिल सिंह के घर की ओर दौड़ गया। जिससे वह गुलदार के हमले से बच गया। बागी प्रधान नरेश मिश्रा के अनुसार गुलदार की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुये वन विभाग की टीम यहां सुबह शाम गश्त कर रही है। वहीं ग्रामीणों को लगातार सतर्क रहने को कहा जा रहा है। पूर्व प्रधान मुनेठ रजनी सिंह के अनुसार गुलदार के भय से यहां लोग शाम पांच बजे ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं। वहीं गुलदार के अब दिनदहाड़े घूमने से ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ गई है।