सीएससी अब आंदोलन की राह पर, सोमवार को बागेश्वर में बंद का ऐलान
बागेश्वर | डिजिटल इंडिया की रीढ़ कहे जाने वाले CSC (कॉमन सर्विस सेंटर) संचालकों के साथ हो रही कथित नाइंसाफी को लेकर बागेश्वर जिले में असंतोष खुलकर सामने आ गया है। बिना समुचित जांच के आरोप लगाना, मामूली या गलत शिकायतों पर सीधे ID बंद कर देना, समय पर कमीशन का भुगतान न होना और तकनीकी खामियों का सारा दोष संचालकों पर मढ़ देना—इन सभी मुद्दों ने जिले के CSC संचालकों को आंदोलित कर दिया है।
बिना सुने मिल रही सज़ा! CSC संचालकों का आरोप है कि कई मामलों में लाभार्थियों की गलती, सर्वर डाउन रहने या विभागीय स्तर पर देरी के कारण सेवाएं बाधित होती हैं, लेकिन शिकायत दर्ज होते ही संचालक को दोषी मान लिया जाता है। न तो उनका पक्ष सुना जाता है और न ही सुधार का अवसर दिया जाता है। परिणामस्वरूप, वर्षों की मेहनत से खड़ा किया गया सेंटर एक झटके में बंद हो जाता है।
अपना निवेश, फिर भी असुरक्षा संचालकों का कहना है कि वे अपने निजी संसाधनों से CSC संचालित करते हैं—कंप्यूटर, प्रिंटर, बिजली, इंटरनेट, स्टाफ और अन्य खर्च स्वयं उठाते हैं। इसके बावजूद उन्हें न तो स्थायी मान्यता मिलती है और न ही किसी प्रकार की सामाजिक सुरक्षा। न पेंशन, न बीमा और न ही आय की कोई गारंटी।
मासिक मानदेय की मांग CSC संचालकों ने सरकार से स्पष्ट मांग की है कि उन्हें मासिक मानदेय/तनख्वाह दी जाए, ताकि न्यूनतम आय-सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और वे निर्बाध रूप से सरकारी सेवाएं जनता तक पहुंचा सकें। उनका कहना है कि जब वे सरकार और नागरिकों के बीच सेतु का काम कर रहे हैं, तो उन्हें सम्मान और संरक्षण मिलना चाहिए।
प्रशासनिक कार्रवाई से भड़का आक्रोश विगत दिवस प्रशासन द्वारा की गई छापेमारी और कार्रवाई के बाद जिले भर में CSC संचालकों में भारी रोष है। संचालकों का आरोप है कि कार्रवाई एकतरफा रही और नियमों की व्याख्या में पारदर्शिता नहीं बरती गई।
पूरे जिले में कार्य बहिष्कार का ऐलान इसी असंतोष को अमली जामा पहनाने के लिए जिले के समस्त CSC संचालकों ने आगामी सोमवार को पूरे बागेश्वर जिले में पूर्ण कार्य बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। इस दौरान जिले के सभी कॉमन सर्विस सेंटर बंद रहेंगे, जिससे सरकारी योजनाओं से जुड़ी ऑनलाइन सेवाएं, प्रमाण पत्र, पेंशन, राशन, बिजली-पानी बिल, बैंकिंग एवं अन्य डिजिटल सेवाएं ठप रहने की संभावना है।
CSC संचालकों का कहना है कि यह निर्णय मजबूरी में लिया गया है। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुना जाएगा और प्रशासन द्वारा निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा नहीं दिया जाएगा, तब तक वे चुप बैठने को तैयार नहीं हैं।
इसी क्रम में सोमवार को जिले स्तर पर एक आपातकालीन (एमरजेंसी) बैठक भी आयोजित की जा रही है, जिसमें सभी CSC संचालक एकजुट होकर आगे की रणनीति, संभावित आंदोलन और प्रशासन से वार्ता की रूपरेखा तय करेंगे।
प्रशासन से संवाद की अपील CSC संचालकों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से अपील की है कि वे संवाद का रास्ता अपनाएं, निष्पक्ष जांच प्रक्रिया सुनिश्चित करें और शिकायत निवारण के लिए पारदर्शी तंत्र विकसित करें। संचालकों का कहना है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो यह डिजिटल सेवाओं की निरंतरता और ग्रामीण नागरिकों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा।
निष्कर्ष डिजिटल सेवाओं की सफलता उन हाथों पर टिकी है, जो गांव-गांव तक सरकार की योजनाएं पहुंचाते हैं। यदि वही हाथ उपेक्षा का शिकार होंगे, तो डिजिटल इंडिया का सपना कैसे साकार होगा? अब देखना यह है कि प्रशासन इस उबाल को गंभीरता से लेते हुए CSC संचालकों की बात सुनता है या नहीं।
