January 29, 2026

मतदाता सूचियों में भारी अंतर पर अखिलेश यादव का सवाल, तीन करोड़ मतदाता गायब होने का आरोप


लखनऊ समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की विभिन्न मतदाता सूचियों में सामने आ रहे बड़े अंतर को लेकर सरकार और निर्वाचन आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह डबल इंजन की सरकार है या डबल ब्लंडर की सरकार, यह जनता के सामने स्पष्ट होना चाहिए, क्योंकि विधानसभा, पंचायत और नगर निकाय चुनावों की मतदाता सूचियों में लाखों नहीं बल्कि करोड़ों मतदाताओं का अंतर दिखाई दे रहा है, जिसका अब तक कोई ठोस स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।अखिलेश यादव के अनुसार निर्वाचन आयोग और अन्य आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी बताती है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा मतदाता सूची (एसआईआर के बाद, प्रारूप–2026) में 12.56 करोड़ मतदाता दर्ज हैं, जबकि उत्तर प्रदेश पंचायत मतदाता सूची (एसआईआर संशोधित अस्थायी–2026) में यह संख्या 12.70 करोड़ बताई जा रही है। वहीं उत्तर प्रदेश नगर निकाय मतदाता सूची (चुनाव वर्ष–2023) में लगभग 4.32 करोड़ मतदाता दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह मान भी लिया जाए कि नगर निकाय मतदाता सूची में कुछ त्रुटियाँ हैं और एसआईआर के बाद अधिकतम 25 प्रतिशत यानी करीब 1.08 करोड़ मतदाताओं की कटौती होती है, तब भी संशोधन के बाद नगर निकाय मतदाता सूची में लगभग 3.24 करोड़ मतदाता शेष रहने चाहिए।उन्होंने आगे कहा कि इस स्थिति में उत्तर प्रदेश पंचायत मतदाता सूची और नगर निकाय मतदाता सूची का कुल योग लगभग 15.80 करोड़ होना चाहिए, जबकि विधानसभा मतदाता सूची में केवल 12.56 करोड़ मतदाता दर्ज हैं। ऐसे में लगभग 3 करोड़ मतदाता आखिर कहाँ गायब हो गए, यह एक गंभीर और चिंताजनक प्रश्न है।समाजवादी पार्टी ने इन आंकड़ों के आधार पर आशंका जताई है कि क्या भारतीय जनता पार्टी के दबाव में निर्वाचन आयोग पिछड़े वर्गों, दलितों, आदिवासियों और ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों के मताधिकार को सीमित या दबाने का प्रयास कर रहा है। पार्टी ने मांग की है कि इस पूरे मामले पर निर्वाचन आयोग और सरकार पारदर्शी तरीके से स्थिति स्पष्ट करें, ताकि लोकतंत्र में जनता का विश्वास बना रहे।