January 29, 2026

कपकोट तहसील में प्रशासनिक सक्रियता का सशक्त संदेश: डीएम आकांक्षा कोंडे का औचक निरीक्षण


बागेश्वर। जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे ने मंगलवार को तहसील कपकोट का औचक निरीक्षण कर प्रशासनिक व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनसुविधाएँ शासन-प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं और इनमें किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लंबित मामलों का निस्तारण निर्धारित समयसीमा के भीतर, गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ सुनिश्चित किया जाए, ताकि आम नागरिकों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने जनहित को केंद्र में रखते हुए उपजिलाधिकारी को निर्देशित किया कि सहायक उप निबंधक सप्ताह में अनिवार्य रूप से दो दिन तहसील कपकोट में उपस्थित रहकर आमजन की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने इस संबंध में तत्काल प्रभाव से आवश्यक पत्राचार करने के निर्देश भी दिए, ताकि व्यवस्था शीघ्र लागू हो सके और जनता को सीधा लाभ मिल सके।
जिलाधिकारी ने दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान देते हुए स्पष्ट किया कि इसका निस्तारण नियमानुसार निर्धारित समयसीमा के भीतर ही किया जाए। उन्होंने राजस्व एवं जनसेवा से जुड़ी प्रक्रियाओं में अधिकतम डिजिटलीकरण पर जोर देते हुए कहा कि डिजिटल माध्यमों के उपयोग से सेवाएँ न केवल तेज होंगी, बल्कि पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी। उन्होंने जानकारी दी कि उत्तराखंड राजस्व परिषद द्वारा हाल ही में ई-भूलेख, भू-मैप, ई-परमिशन, एग्री लोन तथा ई-आरसीएस जैसे कई ऑनलाइन पोर्टल प्रारंभ किए गए हैं, जिनके माध्यम से भूमि अभिलेखों का सत्यापन, नक्शों की ऑनलाइन उपलब्धता और संपत्ति से संबंधित विभिन्न अनुमतियाँ अब घर बैठे प्राप्त की जा सकती हैं।
इसके पश्चात जिलाधिकारी ने तहसील कंट्रोल रूम का निरीक्षण किया। लैंडलाइन फोन बंद पाए जाने पर उन्होंने गहरी नाराजगी व्यक्त की और उसे तत्काल सुचारु करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन, आपात स्थितियों तथा सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान के लिए कंट्रोल रूम का पूर्णतः सक्रिय रहना अत्यंत आवश्यक है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम ला सकती है।
विभिन्न पटलों के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने पत्रावलियों के सुव्यवस्थित रखरखाव पर विशेष बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि तहसील स्तर से निर्गत होने वाले सभी प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से निर्धारित समयसीमा के भीतर जारी किए जाएँ, ताकि जनता का प्रशासन पर विश्वास और अधिक सुदृढ़ हो सके।
निरीक्षण के दौरान उपजिलाधिकारी अनिल चन्याल, तहसीलदार नितिशा आर्य सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। जिलाधिकारी का यह औचक निरीक्षण न केवल प्रशासनिक सतर्कता का परिचायक रहा, बल्कि जनहित में शासन की गंभीरता और जवाबदेही को भी स्पष्ट रूप से दर्शाता है।