January 29, 2026

बागेश्वर के अमर प्रतीक बने शहीद हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया


बागेश्वर। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जनपद अंतर्गत सिंहपोरा क्षेत्र में आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ के दौरान अदम्य साहस का परिचय देते हुए स्पेशल फोर्सेज के हवलदार, कपकोट तहसील के बीथी गांव निवासी गजेंद्र सिंह गढ़िया के वीरगति को प्राप्त होने से समूचे बागेश्वर जनपद में गहन शोक और गर्व का भाव एक साथ व्याप्त हो गया। उनका बलिदान न केवल जनपद बल्कि समूचे राष्ट्र के लिए गौरव और प्रेरणा का शाश्वत स्रोत बन गया है।
मंगलवार को शहीद हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया का पार्थिव शरीर सैन्य हेलीकॉप्टर के माध्यम से उनके गृह जनपद बागेश्वर के कपकोट लाया गया। पीजी कॉलेज ग्राउंड में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह के दौरान “भारत माता की जय” और “शहीद गजेंद्र सिंह अमर रहें” के गगनभेदी नारों से वातावरण राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत हो उठा। इस अवसर पर शहीद के माता-पिता, पत्नी, परिजन, ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर नम आंखों से अपने वीर सपूत को अंतिम नमन किया।
अंतिम संस्कार से पूर्व सेना की 19 सिख रेजिमेंट की टुकड़ी द्वारा शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। सैन्य अधिकारियों ने शहीद के शौर्य, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता का स्मरण करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा के लिए दिया गया उनका सर्वोच्च बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। यह बलिदान आने वाली पीढ़ियों को देशसेवा के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा।
शहीद हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया का अंतिम संस्कार सरयू–खीरगंगा संगम पर पूरे सैन्य सम्मान और विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। अंतिम विदाई के क्षणों में शहीद के पिता धन सिंह, माता चंद्रा देवी, पत्नी लीला देवी तथा अन्य परिजनों की आंखों में अथाह वेदना स्पष्ट झलक रही थी, वहीं बीथी गांव सहित पूरे क्षेत्र के लोगों ने गर्व और सम्मान के साथ अपने वीर सपूत को अंतिम सलामी दी। जनसमूह की एक ही भावना थी कि गजेंद्र सिंह गढ़िया का बलिदान देश और समाज के लिए अमर प्रेरणा बनकर सदैव जीवित रहेगा।
इस अवसर पर जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे, पैरा लेफ्टिनेंट कर्नल हरी लुइस, विधायक सुरेश गड़िया, दर्जा राज्य मंत्री शिव सिंह विष्ट, उपजिलाधिकारी अनिल चनयाल, सैनिक कल्याण अधिकारी विजय मनराल सहित जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, सेना के वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। पूरे वातावरण में शोक, सम्मान और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने शहीद के बलिदान को एक अमिट स्मृति में परिवर्तित कर दिया।