गरुड बैजनाथ धाम में मौन उपवास के माध्यम से कांग्रेस का आक्रोश
जगतगुरु शंकराचार्य अभिमुक्तेश्वरानन्द जी के साथ दुर्व्यवहार के विरोध में गरुड़ में सशक्त प्रतीकात्मक प्रतिवाद
गरुड़, बागेश्वर । ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बैजनाथ धाम परिसर में जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अभिमुक्तेश्वरानन्द जी के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार के विरोध में दो घंटे का मौन उपवास रखा गया। इस मौन उपवास के माध्यम से उपस्थित जनसमूह ने न केवल अपना गहरा रोष व्यक्त किया, बल्कि भारतीय सनातन परंपरा, गुरु-शिष्य परंपरा और आध्यात्मिक मर्यादाओं की रक्षा के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता भी प्रदर्शित की।
मौन उपवास कार्यक्रम पूर्णतः शांत, गरिमामय और अनुशासित वातावरण में सम्पन्न हुआ। उपवास में सम्मिलित लोगों ने मौन रहकर यह संदेश दिया कि संत-महात्माओं के सम्मान से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। वक्ताओं ने अनौपचारिक संवाद में कहा कि जगतगुरु जैसे उच्च आध्यात्मिक पद पर आसीन संत के साथ दुर्व्यवहार केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सनातन संस्कृति और उसके मूल्यों पर आघात है।
इस अवसर पर ब्लॉक अध्यक्ष नरेंद्र सिंह बिष्ट, नगर अध्यक्ष रंजीत रावत, प्रकाश कोहली, लक्ष्मण आर्या, बबलू फर्शवान, गिरीश तिवाड़ी, आनंद राम, महेश भंडारी, प्रकाश चंद्र, दीपक कोहली, नरेंद्र कुमार सहित अनेक सामाजिक एवं धार्मिक चेतना से जुड़े गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में घटना की निंदा करते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया।
मौन उपवास के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि उत्तराखंड की देवभूमि में संतों, धर्माचार्यों और धार्मिक संस्थानों के सम्मान की रक्षा के लिए समाज सजग है और आवश्यकता पड़ने पर शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों के अनुरूप संघर्ष करने से पीछे नहीं हटेगा। बैजनाथ धाम में आयोजित यह मौन उपवास न केवल एक विरोध कार्यक्रम था, बल्कि सनातन चेतना के संरक्षण का एक सशक्त और विचारोत्तेजक प्रतीक भी बनकर उभरा।
