February 9, 2026

गरुड में नाबालिग की शादी पर पुलिस का सख़्त प्रहार: बागेश्वर में एण्टी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने समय रहते रोका बाल विवाह, गांव-गांव तक फैलाई क़ानूनी जागरूकता


बागेश्वर। जनपद बागेश्वर में कानून की सजगता और मानवीय संवेदनशीलता का एक सशक्त उदाहरण सामने आया है। दिनांक 02 फरवरी 2026 को कोतवाली बैजनाथ क्षेत्रान्तर्गत ग्राम चनौली में एक नाबालिग बालिका का विवाह फरवरी माह के तृतीय सप्ताह में तय होने की सूचना प्राप्त होते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया। सूचना की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्यवाही करते हुए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया तथा मामले की सत्यता की पुष्टि के लिए संयुक्त टीम का गठन किया गया।
प्रभारी डीसीआरबी निरीक्षक श्री टी.आर. बगरेठा के निर्देशन में प्रभारी ए.एच.टी.यू. (एण्टी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट) / प्रभारी महिला हेल्पलाइन उपनिरीक्षक मीना रावत, बाल कल्याण समिति (CWC), वन स्टॉप सेंटर तथा कोतवाली बैजनाथ पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुँची। दस्तावेजों की गहन जांच में यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित बालिका की आयु 18 वर्ष से कम है और प्रस्तावित विवाह बाल विवाह निषेध अधिनियम का प्रत्यक्ष उल्लंघन है। तत्पश्चात टीम द्वारा तत्काल हस्तक्षेप करते हुए न केवल विवाह को रुकवाया गया, बल्कि परिजनों की काउंसलिंग कर उन्हें कानून की गंभीरता, सामाजिक दुष्परिणामों तथा बालिका के अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया।
काउंसलिंग के उपरान्त बालिका के परिजनों द्वारा लिखित प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से यह आश्वासन दिया कि पुत्री का विवाह उसके बालिग होने के बाद ही किया जाएगा। यह पहल न केवल एक बालिका के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध हुई, बल्कि समाज में सकारात्मक संदेश देने वाली भी रही।
इसी क्रम में पुलिस टीम द्वारा ग्राम चलौनी में “पुलिस आपके द्वार” कार्यक्रम के तहत स्थानीय ग्रामीणों को बाल विवाह, बाल अपराध, महिला सुरक्षा, मानव तस्करी, साइबर अपराध, नशा मुक्ति, यातायात नियमों, ऑपरेशन मुक्ति, बाल भिक्षावृत्ति जैसी ज्वलंत सामाजिक समस्याओं पर विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही डायल-112, महिला हेल्पलाइन-1090, चाइल्ड हेल्पलाइन-1098 तथा साइबर हेल्पलाइन-1930 जैसे महत्वपूर्ण आपातकालीन संसाधनों की उपयोगिता से भी अवगत कराया गया।
कार्यक्रम के दौरान उत्तराखण्ड पुलिस एप को डाउनलोड करने तथा उसके अंतर्गत महिलाओं की सुरक्षा के लिए उपलब्ध “गौरा शक्ति” फीचर की विशेष रूप से जानकारी दी गई। पुलिस-प्रशासन ने ग्रामीणों से कानून व्यवस्था बनाए रखने, सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध सजग रहने और प्रशासन के साथ सक्रिय सहयोग की अपील की।
यह सम्पूर्ण कार्रवाई न केवल उत्तराखण्ड पुलिस की प्रतिबद्धता और तत्परता को दर्शाती है, बल्कि यह भी सिद्ध करती है कि यदि सूचना समय पर मिले और प्रशासन संवेदनशील हो, तो समाज की सबसे कमजोर कड़ी को भी सशक्त और सुरक्षित बनाया जा सकता हैं।

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