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October 13, 2026

भारत को बड़ा झटका : बांग्लादेश ने कपास खरीद के लिए अमेरिका से मिलाया हाथ, गोपनीय तरीके से हुआ समझौता


ढाका । बांग्लादेश में आज यानी गुरुवार को हो रहे आम चुनावों के बीच एक बड़ी खबर ने कूटनीतिक और व्यापारिक गलियारों में हलचल मचा दी है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस ने भारत को एक बड़ा आर्थिक झटका देते हुए कपड़ा उद्योग के लिए कपास (ष्टशह्लह्लशठ्ठ) की खरीद अब भारत के बजाय अमेरिका से करने का फैसला किया है। चुनाव से ठीक तीन दिन पहले, 9 फरवरी को यूनुस सरकार ने अमेरिका के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौता किया है, जिसके तहत बांग्लादेश अब अमेरिकी कपास का प्रमुख खरीदार बनेगा।
गोपनीय तरीके से हुआ समझौता, ‘गेम चेंजरÓ का दावा
मोहम्मद यूनुस की सरकार ने इस समझौते को बेहद गोपनीय रखा और इसका ड्राफ्ट किसी के साथ साझा नहीं किया गया, जिससे इसकी पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, मुख्य सलाहकार के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने एक इंटरव्यू में इस समझौते को बांग्लादेशी अर्थव्यवस्था के लिए ‘गेम चेंजरÓ करार दिया है। समझौते के तहत अमेरिका ने बांग्लादेशी कपड़ों पर लगने वाले टैरिफ में एक प्रतिशत की कटौती कर उसे 19त्न कर दिया है। यह दर अब कंबोडिया और इंडोनेशिया जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के बराबर हो गई है। सबसे अहम शर्त यह है कि यदि बांग्लादेश अपने कपड़े अमेरिकी कपास या मानव निर्मित फाइबर से बनाता है, तो उस पर अमेरिका में कोई टैरिफ नहीं लगेगा यानी वह ‘जीरो ड्यूटीÓ पर सामान बेच सकेगा।
शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से बिगड़े रिश्ते
इस फैसले को भारत और बांग्लादेश के बीच बढ़ते तनाव का नतीजा माना जा रहा है। 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना के तख्तापलट और भारत द्वारा उन्हें शरण दिए जाने के बाद से दोनों देशों के संबंधों में खटास आ गई थी। 2024 में भारत ने बांग्लादेश को 1.6 अरब डॉलर का कपास धागा बेचा था, लेकिन रिश्तों में आई कड़वाहट के बाद व्यापार प्रभावित हुआ। तनाव इतना बढ़ा कि 13 अप्रैल 2025 को बांग्लादेश ने जमीनी रास्ते से भारतीय कपास के आयात पर रोक लगा दी थी। इसके जवाब में भारत ने भी 16 मई 2025 से बांग्लादेशी रेडीमेड गारमेंट्स की जमीनी रास्ते से एंट्री बंद कर दी थी। अब अमेरिका के साथ हुई इस डील ने भारत के लिए एक बड़े बाजार के दरवाजे लगभग बंद कर दिए हैं।
दूरी और गुणवत्ता बनी बड़ी चुनौती
भले ही यूनुस सरकार इसे एक बड़ी उपलब्धि मान रही हो, लेकिन अर्थशास्त्रियों ने इस राह में बड़ी चुनौतियां भी गिनाई हैं। ब्रैक यूनिवर्सिटी के प्रमुख अर्थशास्त्री प्रोफेसर सलीम जहान ने चेतावनी दी है कि अमेरिका बांग्लादेश से भौगोलिक रूप से काफी दूर है, जिसके चलते वहां से कपास मंगवाने में शिपिंग चार्ज (माल ढुलाई भाड़ा) बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा। इससे टैरिफ में मिली छूट का फायदा खत्म हो सकता है। इसके अलावा, गुणवत्ता भी एक बड़ा सवाल है। टेक्सटाइल सेक्टर में कपास की क्वालिटी सबसे अहम होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय और मिस्र की कपास की गुणवत्ता बेहतरीन मानी जाती है। यदि अमेरिकी कपास उस स्टैंडर्ड पर खरी नहीं उतरी, तो अमेरिकी खरीदार ही बांग्लादेश के बनाए कपड़े रिजेक्ट कर सकते हैं।

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