February 21, 2026

देवकी लघु वाटिका में जैव विविधता का जीवंत पाठ: 37 वन आरक्षी प्रशिक्षुओं ने सीखे प्रकृति संरक्षण और संयुक्त वनों के विकास के सूत्र

बागेश्वर। प्रकृति, पर्यावरण और मानवीय संवेदनाओं के अद्भुत समन्वय का साक्षात् दृश्य उस समय देखने को मिला जब के 37 वन आरक्षी प्रशिक्षु, प्रख्यात वन अधिकारी के निर्देशन में मंडलसेरा स्थित देवकी लघु वाटिका के अवलोकन हेतु पहुँचे। यह भ्रमण मात्र औपचारिक अध्ययन नहीं, बल्कि जैव विविधता, पारिस्थितिकी संतुलन और सामुदायिक सहभागिता के जीवंत प्रयोगों को समझने का एक सशक्त अवसर सिद्ध हुआ।

प्रशिक्षुओं ने देवकी लघु वाटिका में पुनर्जीवित जल स्रोतों की संरचना और संरक्षण की पद्धतियों का सूक्ष्म अध्ययन किया। प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन के साथ-साथ मुगा रेशम की खेती जैसे नवाचारों ने सभी का विशेष ध्यान आकर्षित किया। इस अवसर पर सिलिंग, च्युरा, जामुन, बिच्छू घास (सिसौना), मेहल, घिंगारु, नाशपाती, पय्या चेरी, बांस, रिंगाल, चंदन और रुद्राक्ष सहित अनेक स्थानीय एवं बहुउपयोगी प्रजातियों की उपयोगिता, पारिस्थितिक महत्ता और आर्थिक संभावनाओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। यह वाटिका आज एक जीवंत प्रयोगशाला के रूप में स्थापित हो चुकी है, जहाँ जैव विविधता और जल संरक्षण एक साथ फलित होते दिखाई देते हैं।

कार्यक्रम के दौरान किशन सिंह मलड़ा ने सभी प्रशिक्षुओं और अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वनों का विकास केवल हरित आच्छादन बढ़ाने का प्रयास नहीं, बल्कि मानवीय सामाजिक पर्यावरण को समझते हुए प्रकृति के साथ संतुलित सह-अस्तित्व की दिशा में एक सतत पहल है। उन्होंने विशेष रूप से चीड़ की खेती को उसके स्वभाव और भौगोलिक अनुकूलता के अनुसार दक्षिणी एवं उत्तरी ढालों पर संयुक्त वनों के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे पारिस्थितिक संतुलन के साथ जैव विविधता भी सुदृढ़ हो सके।

उल्लेखनीय है कि श्री बलवंत सिंह शाही पूर्व में बागेश्वर जनपद में अपनी सेवाएँ प्रदान कर चुके हैं। उनके मार्गदर्शन और सहयोग से नक्षत्र वाटिका लकड़ियाथल, शांति वन पंत क्वैराली, नंदा स्मृति वाटिका मेलाडूंगरी, गरुड़ गंगा तथा निलेश्वर क्षेत्र जैसे अनेक स्थलों पर पौधरोपण और संरक्षण के कार्यों को नई दिशा मिली। देवकी लघु वाटिका में उनका योगदान आज एक सशक्त उदाहरण के रूप में दृष्टिगोचर होता है, जिसका सकारात्मक प्रभाव वर्तमान प्रशिक्षुओं को प्रेरणा स्वरूप प्राप्त हो रहा है।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर श्रीमती देवकी देवी, रमा देवी, ममता देवी, मनीषा, टीना मलड़ा एवं देशदीपक द्वारा महोगनी, माउं और अपराजिता के पौधे भेंट कर सभी अतिथियों का स्वागत किया गया। यह पौध-भेंट केवल औपचारिक सम्मान नहीं, बल्कि हरित भविष्य के प्रति सामूहिक संकल्प का प्रतीक थी।

इस अवसर ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब प्रशासनिक दक्षता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और स्थानीय समुदाय की सहभागिता एक साथ आती है, तब वन केवल वृक्षों का समूह नहीं रहते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन, समृद्धि और संतुलन का आधार बन जाते हैं। देवकी लघु वाटिका का यह प्रयास निःसंदेह समूचे क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत है और भविष्य में इसके दूरगामी सुखद परिणाम देखने को मिलेंगे।

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