आकाश की ऊँचाइयों पर गरुड़ का ‘भरत’: तिलसारी का लाल बना का पायलट, क्षेत्र में गर्व और उल्लास की लहर
बागेश्वर, गरुड़। पर्वतीय अंचल की शांत वादियों से उड़ान भरकर आकाश की असीम ऊँचाइयों तक पहुँचना केवल स्वप्न नहीं, अदम्य संकल्प का परिणाम होता है—और इस सत्य को साकार किया है गरुड़ के तिलसारी निवासी भरत पिरसाली ने। सेंट एडम्स पब्लिक स्कूल, गरुड़ के पूर्व छात्र भरत का चयन देश की प्रतिष्ठित विमानन सेवा में पायलट पद पर हुआ है। जैसे ही यह समाचार क्षेत्र में पहुँचा, समूचे गरुड़ और बागेश्वर में हर्ष, गौरव और प्रेरणा की एक साथ तरंगें फैल गईं।
भरत की प्रारंभिक शिक्षा सेंट एडम्स पब्लिक स्कूल, गरुड़ से कक्षा 8 तक संपन्न हुई। तत्पश्चात कक्षा 9 और 10 की पढ़ाई हल्द्वानी स्थित सिनखिया पब्लिक स्कूल में तथा 11 और 12 की शिक्षा गुड़गाँव के सहवाग इंटरनेशनल स्कूल से प्राप्त की। उच्च शिक्षा हेतु उन्होंने से स्नातक उपाधि अर्जित की और उसके उपरांत नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की कठिन परीक्षा उत्तीर्ण कर अपने लक्ष्य की ओर निर्णायक कदम बढ़ाया। कानपुर में तीन वर्षों के कठोर और अनुशासित प्रशिक्षण ने उनके व्यक्तित्व को पेशेवर दक्षता, धैर्य और नेतृत्व क्षमता से परिपूर्ण किया—जिसका प्रतिफल आज समूचा क्षेत्र गर्व से देख रहा है।
भरत के पिता रेवाधर पिरसाली, जो एक व्यवसायी हैं, बताते हैं कि उनके पुत्र ने बचपन से ही पायलट बनने का स्वप्न देखा था। माता दुर्गा पिरसाली, एक समर्पित गृहिणी, ने संस्कारों और अनुशासन की वह नींव रखी, जिसने इस स्वप्न को आकार दिया। परिवार में दो बहनों के बीच पले-बढ़े भरत ने सदैव शिक्षा और परिश्रम को सर्वोपरि रखा। छोटी बहन सरिता में प्रोफेसर हैं, जबकि बड़ी बहन मीनाक्षी नोएडा के एएफटी कॉलेज से संगीत डिप्लोमा कर रही हैं—यह परिवार की बहुआयामी प्रतिभा और शैक्षिक प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण है।
भरत की इस उपलब्धि पर उनके मामा आईपीएस महेश पांडे सहित बालादत्त भट्ट, कमला भट्ट, दया कृष्ण पांडे, शांति देवी, दर्जा राज्यमंत्री शिव सिंह बिष्ट, कपकोट के पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण, जिला पंचायत अध्यक्ष शोभा आर्या, नगर पंचायत अध्यक्ष भावना वर्मा, ब्लॉक प्रमुख किशन बोरा, सभासद अंकित जोशी तथा सेंट एडम्स पब्लिक स्कूल के प्रबंधक जावेद सिद्दकी और आईटी इंचार्ज मुश्किल सिद्दकी ने हर्ष व्यक्त करते हुए इसे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
गरुड़ की यह उपलब्धि केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि उस विश्वास की विजय है जो पर्वतों की गोद में पलता है और आकाश की सीमा को भी चुनौती देता है। भरत पिरसाली ने सिद्ध कर दिया है कि संकल्प, साधना और सतत परिश्रम से किसी भी ऊँचाई को छुआ जा सकता है—और यही संदेश आज समूचे क्षेत्र के युवाओं के हृदय में नई उड़ान का उत्साह भर रहा है।
