एक्शन मोड में पुलिस अधीक्षक: कानून व्यवस्था पर सख्त संदेश, कोतवाली बैजनाथ का आकस्मिक निरीक्षण
गरुड़, बागेश्वर। जनपद में कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने की दिशा में निर्णायक पहल करते हुए बागेश्वर के पुलिस अधीक्षक (IPS) ने कार्यभार ग्रहण करने के उपरांत जमीनी स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली का प्रत्यक्ष आकलन प्रारंभ कर दिया है। इसी क्रम में दिनांक 21 फरवरी 2026 की सायंकाल उन्होंने कोतवाली बैजनाथ का आकस्मिक निरीक्षण कर विभागीय गतिविधियों का सूक्ष्म परीक्षण किया। यह निरीक्षण न केवल प्रशासनिक सतर्कता का संकेत था, बल्कि जनसुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का स्पष्ट संदेश भी था।
निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक ने कोतवाली परिसर के विभिन्न महत्वपूर्ण अनुभागों—मालखाना, कार्यालय अभिलेख कक्ष, हवालात तथा मेस—का बारीकी से अवलोकन किया। अभिलेखों के संधारण, मालखाने की व्यवस्थाओं तथा स्वच्छता मानकों की उन्होंने गंभीरता से समीक्षा की और आवश्यक सुधारात्मक निर्देश दिए। उन्होंने लंबित विवेचनाओं के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर विशेष बल देते हुए स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। जन-शिकायतों के संदर्भ में उन्होंने पुलिस कर्मियों को संवेदनशीलता, तत्परता और पारदर्शिता के साथ कार्रवाई सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश प्रदान किए।
अपराध नियंत्रण की रणनीति पर चर्चा करते हुए पुलिस अधीक्षक ने कोतवाली क्षेत्र में व्यापक चेकिंग एवं सत्यापन अभियानों को गति देने की आवश्यकता रेखांकित की। उन्होंने मुख्य चौराहों, भीड़भाड़ वाले स्थलों तथा संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की दृश्य उपस्थिति बढ़ाने पर बल दिया, ताकि अपराधियों में कानून का भय और आमजन में सुरक्षा का विश्वास सुदृढ़ हो। उनके निर्देशों में स्पष्टता थी कि अपराध की रोकथाम केवल प्रतिक्रिया तक सीमित न रहे, बल्कि सक्रिय और पूर्व-नियोजित रणनीति के माध्यम से अपराध की संभावनाओं को ही न्यूनतम किया जाए।
शहर की समग्र सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए उन्होंने सीसीटीवी कैमरों की प्रभावी मॉनिटरिंग को अनिवार्य बताया। उन्होंने निर्देशित किया कि स्थापित कैमरों के माध्यम से संदिग्ध गतिविधियों और अराजक तत्वों पर चौबीसों घंटे सतर्क दृष्टि रखी जाए तथा किसी भी संदिग्ध परिस्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया टीम को घटनास्थल पर रवाना किया जाए। यह तकनीकी संसाधनों के समुचित उपयोग के माध्यम से आधुनिक पुलिसिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान पुलिस कर्मियों के टर्न-आउट (वर्दी), अनुशासन और ड्यूटी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का भी परीक्षण किया गया। पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कर्तव्य पालन में किसी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही को सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात कार्मिकों से संवाद कर उनकी व्यक्तिगत एवं विभागीय समस्याओं की जानकारी ली तथा आवश्यक संसाधनों एवं सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता के संबंध में फीडबैक प्राप्त किया। उनका यह संवादात्मक दृष्टिकोण अधीनस्थों के मनोबल को सुदृढ़ करने तथा कार्य-परिस्थितियों को बेहतर बनाने की दिशा में सकारात्मक संकेत देता है।
निरीक्षण के समापन अवसर पर पुलिस अधीक्षक ने दोहराया कि पुलिस का मूल उद्देश्य जनता में सुरक्षा का सुदृढ़ भाव उत्पन्न करना और अपराधियों में कानून के प्रति भय स्थापित करना है। उन्होंने “मित्र पुलिस” की अवधारणा को व्यवहारिक रूप में साकार करने हेतु सभी कार्मिकों को पूर्ण निष्ठा, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का आह्वान किया। यह आकस्मिक निरीक्षण जनपद में एक सशक्त, जवाबदेह और जनोन्मुख पुलिस व्यवस्था की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
