औषधीय समृद्धि की ओर निर्णायक कदम: बागेश्वर में कुटकी प्लांटेशन हेतु व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश
बागेश्वर। हिमालयी अंचल की प्राकृतिक संपदा को संरक्षित रखते हुए स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में जनपद बागेश्वर में औषधीय पादप उत्पादन को नई गति देने का संकल्प लिया गया है। जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में विशेष रूप से कुटकी प्लांटेशन को व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक आधार प्रदान करने के उद्देश्य से विस्तृत, क्रियान्वयन योग्य कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि फरवरी माह के अंत तक भेषज विभाग सहित सभी संबंधित विभाग एक समन्वित और व्यावहारिक योजना प्रस्तुत करें, ताकि इस महत्वाकांक्षी पहल को धरातल पर प्रभावी ढंग से उतारा जा सके।
बैठक के दौरान पारदर्शिता और प्रगति के सटीक मूल्यांकन को प्राथमिकता देते हुए जिलाधिकारी ने भेषज समन्वयक को प्लांटेशन क्षेत्रों की ‘बिफोर एवं आफ्टर’ फोटोग्राफी तथा ड्रोन वीडियो तैयार कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि औषधीय पादप उत्पादन को सुदृढ़, संगठित और परिणामोन्मुख बनाने के लिए कम से कम 15 मास्टर ट्रेनरों का चयन कर उन्हें प्रशिक्षित किया जाए, ताकि चरणबद्ध प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से काश्तकारों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक पद्धतियों से जोड़ा जा सके।
जिलाधिकारी ने भेषज विभाग, कृषि विभाग, सिंचाई विभाग एवं खंड विकास अधिकारियों को परस्पर समन्वय के साथ कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। कृषि अधिकारी को वर्मी कम्पोस्ट पिट के लिए विस्तृत सर्वेक्षण कर क्लस्टर आधारित कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए, जिससे जैविक खेती को बढ़ावा मिले और औषधीय पौधों की गुणवत्ता में वृद्धि हो। साथ ही अधिकारियों को क्षेत्र भ्रमण कर काश्तकारों से सीधा संवाद स्थापित करने, उनकी आवश्यकताओं—खाद, सिंचाई, कीटनाशक, प्रशिक्षण एवं विपणन—की जानकारी लेकर समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा गया।
सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए सिंचाई एवं लघु सिंचाई विभाग को संयुक्त सर्वेक्षण कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए। भेषज समन्वयक ताहिर हुसैन ने जानकारी दी कि कर्मी, सोराग, बदियाकोट, डौला, बोरबलड़ा एवं कीमू ग्राम पंचायतों में लगभग 500 नाली क्षेत्र में औषधीय पौध उत्पादन के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी आरसी तिवारी, कृषि अधिकारी राजेंद्र उप्रेती तथा अधिशासी अभियंता सिंचाई सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। यह पहल न केवल औषधीय कृषि को नई दिशा देगी, बल्कि स्थानीय किसानों की आय में स्थायी वृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त करेगी, जिससे बागेश्वर जनपद आत्मनिर्भरता और हरित अर्थव्यवस्था की ओर एक सशक्त कदम बढ़ा सकेगा।
