March 9, 2026

नेता प्रतिपक्ष ने राज्यपाल के अभिभाषण को बताया निराशाजनक और दिशाहीन


देहरादून ।  उत्तराखंड विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य  ने इसे निराशाजनक, दिशाहीन, संकल्पविहीन और विकास विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि अपने लंबे सार्वजनिक और संसदीय जीवन में उन्होंने इतना कमजोर और वास्तविकता से कटा हुआ अभिभाषण पहले कभी नहीं सुना। उन्होंने कहा कि यह अभिभाषण “सफेद कागज पर झूठ की काली स्याही से लिखी इबारत” जैसा है, जिसमें प्रदेश की वास्तविक समस्याओं, जनता की पीड़ा और राज्य के सामने खड़ी चुनौतियों का कहीं उल्लेख नहीं है। आर्य के अनुसार राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की प्राथमिकताओं, नीतियों और लक्ष्यों का दस्तावेज होता है, लेकिन इसमें पिछले चार वर्षों की उपलब्धियों और अधूरे लक्ष्यों का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वर्ष 2022 में भाजपा सरकार बनने के बाद यह राज्यपाल का पाँचवाँ अभिभाषण है, लेकिन इतने समय बाद भी सरकार के पास बताने के लिए ठोस उपलब्धियाँ नहीं हैं। उनका आरोप है कि सरकार हर वर्ष अपने लक्ष्य बदल देती है या अपने ही घोषित लक्ष्यों से पीछे हट जाती है। उन्होंने सरकार के दावे के अनुसार लागू की गई समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर भी सवाल उठाए। आर्य ने कहा कि सरकार 5.27 लाख आवेदन मिलने की बात कर रही है, लेकिन इनमें से अधिकांश आवेदन सरकारी कर्मचारियों के हैं, जिन्हें प्रशासनिक दबाव या वेतन रुकने के डर से पुराने विवाहों का पुनः पंजीकरण कराने के लिए मजबूर किया गया। आर्य ने “लखपति दीदी” योजना के दावों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि प्रदेश में ढाई लाख महिलाएँ लखपति बन चुकी हैं, तो सरकार उनकी सूची सार्वजनिक करे। उनका आरोप है कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के बजाय उन्हें कर्ज के बोझ तले दबा दिया गया है।उन्होंने चारधाम यात्रा व्यवस्था को लेकर भी सरकार को घेरते हुए कहा कि शीतकालीन यात्रा को बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि पिछले दो यात्रा सीजन में अव्यवस्था और कुप्रबंधन के कारण होटल व्यवसायियों, टैक्सी चालकों, घोड़ा-खच्चर संचालकों और छोटे व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ा है।
आर्य ने कहा कि बागवानी और कृषि योजनाओं में भी किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिला। सब्सिडी और प्रोत्साहन के बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन कई किसानों को अपनी लागत तक नहीं मिल पाई, जिससे वे आर्थिक संकट में फंसते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार चार वर्षों की वास्तविक उपलब्धियाँ बताने के बजाय वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र और विकसित प्रदेश बनाने जैसे दूरगामी नारों के जरिए जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। आर्य ने कहा कि इस अभिभाषण को “विजन डॉ. क्यूमेंट” के बजाय “कन्फ्यूजन डॉ. क्यूमेंट” कहा जाए तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी।