March 31, 2026

जब रक्षक ही बन जाएं भक्षक: गरुड़ की भागवत कथा से उठा आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक जागरण का स्वर


बागेश्वर , गरुड़ । जनपद के गरुड़ क्षेत्र स्थित रामलीला मैदान इन दिनों आध्यात्मिक ऊर्जा, भक्ति और सामाजिक चेतना का अद्वितीय केंद्र बना हुआ है, जहां दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा 22 मार्च से 28 मार्च 2026 तक ‘श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस महायज्ञ में न केवल श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ रही है, बल्कि यह आयोजन सामाजिक समरसता और प्रशासनिक सहभागिता का भी एक नया अध्याय लिखता दिखाई दे रहा है।
विशेष उल्लेखनीय तथ्य यह रहा कि पहली बार किसी धार्मिक संगठन द्वारा इस क्षेत्र में स्थानीय प्रशासन और पत्रकार संगठन को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित कर उनसे दीप प्रज्वलन कराया गया।

इस गरिमामयी अवसर पर उपजिलाधिकारी गरुड़ वैभव कांडपाल, पत्रकार संगठन के अध्यक्ष चन्द्रशेखर बड़सीला, वरिष्ठ पत्रकार विपीन जोशी, कृष्णा गड़िया, दिनेश नेगी तथा संगठन के संरक्षक ‘ व आज की खबर’ के अर्जुन राणा की उपस्थिति इस गरिमामयी कार्यक्रम में रही ।


कथा के तृतीय दिवस पर गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या एवं प्रख्यात भागवताचार्या साध्वी मेरुदेवा भारती ने भक्त प्रह्लाद की दिव्य गाथा का अत्यंत मार्मिक एवं प्रभावशाली वर्णन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार असुरराज हिरण्यकश्यप द्वारा किए गए असहनीय अत्याचारों के बावजूद प्रह्लाद अडिग रहे और ईश्वर के सच्चे नाम की शक्ति से हर संकट से सुरक्षित निकलते रहे।
अपने ओजस्वी प्रवचन में साध्वी जी ने वर्तमान सामाजिक परिदृश्य पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि आज का मानव बाहरी सुरक्षा के साधनों में निरंतर वृद्धि कर रहा है, किंतु फिर भी भय और असुरक्षा से घिरा हुआ है। इसका प्रमुख कारण यह है कि जिन पर सुरक्षा का दायित्व है, वही आज कई स्थानों पर भय का कारण बनते जा रहे हैं। “आज रक्षक ही भक्षक बनते जा रहे हैं,” यह कहते हुए उन्होंने समाज को आत्ममंथन की ओर प्रेरित किया।
उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि वास्तविक सुरक्षा का एकमात्र उपाय ईश्वर का शाश्वत ‘आदि नाम’ है, जो जिह्वा से परे है और जिसे केवल एक ब्रह्मनिष्ठ गुरु ही साधक के भीतर प्रकट कर सकता है। द्रौपदी के चीरहरण प्रसंग का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि इसी दिव्य नाम की अनुभूति के कारण उसकी अस्मिता की रक्षा संभव हुई।
“कलयुग केवल नाम आधार, सुमिर सुमिर नर उतरहि पारा” के सिद्धांत को रेखांकित करते हुए साध्वी मेरुदेवा भारती ने समाज के प्रत्येक व्यक्ति से आह्वान किया कि वह आध्यात्मिक पथ की ओर अग्रसर होकर सच्चे गुरु की शरण में जाए, जिससे उसे जीवन के प्रत्येक संकट से सुरक्षा प्राप्त हो सके।
कथा स्थल पर उपस्थित महिला-पुरुष श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर होकर प्रभु लीला का श्रवण करते हुए झूमते नजर आए। संपूर्ण वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास से ओतप्रोत रहा, जिसने इस आयोजन को केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना के सशक्त मंच के रूप में स्थापित कर रहा हैं।