September 24, 2026

पर्यावरण प्रहरी बचनी देवी ने ली अंतिम सांस


नई टिहरी ।  अदवाणी गांव निवासी चिपको नेत्री बचनी देवी का 100 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने 1977 में हेंवलघाटी के अदवाणी क्षेत्र में जंगलों के व्यापारिक कटान के खिलाफ सशक्त विरोध कर चिपको आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके निधन पर विभिन्न सामाजिक संगठनों और चिपको आंदोलन से जुड़े लोगों ने शोक व्यक्त किया है। बचनी देवी उस समय आंदोलन के शीर्ष नेताओं धूम सिंह नेगी, विजय जड़धारी और सुदेशा बहन के साथ खड़ी हो गई थीं। उनके पति बख्तावर सिंह गांव के प्रधान और जंगलों के ठेकेदार भी थे। इसके बावजूद बचनी देवी ने जंगलों को बचाने के लिए अपने पति व परिवार से विद्रोह किया। उन्होंने दृढ़ता से कहा था कि परिवार बाद में है पहले जंगलों को बचाना है। उन्होंने क्षेत्र की महिलाओं को भी आंदोलन में संगठित करने का कार्य किया। कई दिनों तक परिवार का विरोध झेलते हुए भी वे आंदोलन में सक्रिय भागीदारी करती रहीं। आखिरकार सरकार को अदवाणी में जंगलों के कटान पर रोक लगानी पड़ी।
चिपको आंदोलन के नेता विजय जड़धारी ने बचनी देवी के योगदान को प्रेरणादायी बताया है। उन्होंने चिपको आंदोलन के दर्शन को समझते हुए जंगलों को बचाने का कार्य किया। बचनी देवी हमेशा प्रकृति से जुड़ी रहीं, इसीलिए उन्होंने इतना लंबा जीवन भी जिया। उनका यह कार्य भावी पीढ़ियों के लिए एक मिसाल है। उनका अंतिम संस्कार पैतृक गांव शिवपुरी में किया गया। वे अपने पीछे पांच पुत्रों और दो पुत्रियों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं।
निधन पर धूम सिंह नेगी, सुदेशा बहन, रघुभाई जड़धारी, दयाल सिंह भंडारी, डीपी उनियाल, पूर्व ब्लॉक प्रमुख राजेंद्र भंडारी, पूर्व पालिकाध्यक्ष सूरज राणा, साब सिंह सजवाण, कुसुम रावत ने शोक जताने के साथ ही श्रद्धांजलि दी।