खनन न्यास निधि में अनियमितता के आरोपों पर कांग्रेस का हल्लाबोल, डीएम कार्यालय में दिया धरना
करीब 28 करोड़ रुपये की निधि के वितरण की निष्पक्ष जांच की मांग, कांग्रेस ने प्रशासन पर लगाया चहेतों को लाभ पहुंचाने का आरोप
कहा—खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के बजाय दूसरी योजनाओं में धन खर्च करने की शिकायत, कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन होगा तेज
बागेश्वर। जिला खनन न्यास निधि के वितरण में कथित अनियमितता का मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है। करीब 28 करोड़ रुपये की खनन न्यास निधि के वितरण और उपयोग में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शनिवार को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष अर्जुन भट्ट के नेतृत्व में आयोजित धरने में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदेश सरकार तथा प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि खनन से प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली निधि का अपेक्षित और नियमानुसार उपयोग नहीं किया गया। आरोप लगाया गया कि राजनीतिक दबाव के चलते निधि के वितरण में पारदर्शिता नहीं बरती गई और कथित तौर पर कुछ चहेते लोगों को इसका लाभ पहुंचाया गया।
28 करोड़ की निधि के इस्तेमाल पर उठाए सवाल
धरने के दौरान कांग्रेस नेताओं ने जिला खनन न्यास निधि में उपलब्ध करीब 28 करोड़ रुपये के वितरण और खर्च को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए धनराशि का इस्तेमाल होना चाहिए था, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित विकास दिखाई नहीं दे रहा है।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए निर्धारित धनराशि को दूसरी योजनाओं में खर्च किया गया, जिससे वास्तविक रूप से प्रभावित क्षेत्रों और वहां रहने वाली जनता को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका। उन्होंने पूरे मामले में वित्तीय लेन-देन, स्वीकृत कार्यों, लाभार्थियों और धनराशि के वास्तविक उपयोग की जांच कराने की मांग की।
27 अगस्त को दी गई सूचना का भी उठाया मुद्दा
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अधिवक्ता बसंत कुमार ने 27 अगस्त को खनन न्यास निधि के कथित दुरुपयोग से संबंधित सूचना उपलब्ध कराई थी, लेकिन इसके बावजूद अब तक मामले में कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि निधि के उपयोग को लेकर शिकायत अथवा सूचना प्रशासन के संज्ञान में लाई गई थी तो उसकी जांच क्यों नहीं कराई गई।
वक्ताओं ने कहा कि सार्वजनिक धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। यदि किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
भाजपा पर राजनीतिक दबाव बनाने का आरोप
धरने में कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन पर राजनीतिक दबाव डालकर खनन न्यास निधि का कथित रूप से दुरुपयोग किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि निधि का लाभ पात्र क्षेत्रों और लोगों तक पहुंचाने के बजाय राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों के करीबियों को लाभ पहुंचाया गया।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि खनन गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाली जनता को प्रदूषण, सड़क क्षति, पेयजल समेत विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में खनन न्यास की धनराशि का पहला अधिकार उन्हीं क्षेत्रों के विकास पर होना चाहिए।
निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि मामला केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि निधि के आवंटन से लेकर प्रत्येक कार्य पर हुए खर्च की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। नेताओं ने मांग की कि स्वीकृत कार्यों की सूची, खर्च की गई धनराशि और कार्यों की वास्तविक स्थिति की जांच सार्वजनिक की जाए, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।
कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो पार्टी आंदोलन को और अधिक व्यापक एवं तेज करेगी। उन्होंने कहा कि जनता के विकास के लिए निर्धारित सरकारी धन के इस्तेमाल में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
धरने में जुटे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता
धरने में पूर्व जिलाध्यक्ष भगत सिंह डसीला, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश ऐठानी, पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण, अधिवक्ता बसंत कुमार, बसंत नेगी, बालकृष्ण, हरीश चंद्र, दीपक गढ़िया, किशन कठायत, राजेंद्र टंगणिया समेत कांग्रेस के दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
धरने के दौरान कांग्रेस ने एकजुट होकर जिला खनन न्यास निधि के कथित अनियमित वितरण की जांच की मांग उठाई। अब इस मामले में प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाया जाता है और कांग्रेस के आरोपों पर क्या स्थिति स्पष्ट की जाती है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
