September 9, 2026

मानव-वन्यजीव संघर्ष पर कार्यशाला, बंदरबाड़ा बनाने की तैयारी


बागेश्वर ।  मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम और विभागीय प्रक्रियाओं की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाने के उद्देश्य से मंगलवार को कपकोट और ग्लेशियर वन क्षेत्रों की ग्राम पंचायतों के प्रधानों, सरपंचों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के साथ एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें ग्रामीणों ने बंदरों और जंगली सुअरों से फसलों, बागानों और जनजीवन को हो रहे नुकसान की जानकारी दी। प्रभागीय वन अधिकारी प्रकाश चंद्र आर्य ने बताया कि जिले में जल्द बंदरबाड़ा बनाया जाएगा। विभिन्न क्षेत्रों से पकड़े जाने वाले बंदरों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत इसमें रखा जाएगा। प्रदेश के वन प्रभागों में पशु चिकित्सकों की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। बागेश्वर वन प्रभाग में भी जल्द पशु चिकित्सक की नियुक्ति की जाएगी, ताकि बंदरबाड़े में रखे गए बंदरों की स्वास्थ्य देखभाल हो सके।
जंगली सूअरों के लिए पायलट प्रोजेक्ट:
जंगली सुअरों से फसल नुकसान कम करने के लिए वन विभाग पायलट प्रोजेक्ट तैयार कर रहा है। इसके तहत कपकोट, गरुड़ और बागेश्वर विकासखंडों के तीन-तीन गांवों का चयन किया जाएगा। चयनित गांवों में रिमोट सेंसिंग तकनीक से युक्त पिंजरों का इस्तेमाल किया जाएगा और ग्रामीणों की सहभागिता से जंगली सुअरों की समस्या नियंत्रित करने का प्रयास होगा।
कार्यशाला का उद्देश्य और जानकारी:
डीएफओ ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष का स्थायी समाधान विभाग, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। उन्होंने ग्रामीणों को शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया और राहत-मुआवजा व्यवस्था की जानकारी भी दी। कार्यशाला में कपकोट के वन क्षेत्राधिकारी नारायण दत्त पांडे, ग्लेशियर रेंज की डॉली डोभाल समेत विभागीय अधिकारी-कर्मचारी, ग्राम प्रधान, सरपंच, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे।

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