अंकिता प्रकरण में निष्पक्ष जांच पूरी होने तक संवैधानिक नियुक्ति न हो: पीसी तिवारी
अल्मोड़ा । उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के संयोजक पीसी तिवारी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित वीआईपी एंगल और न्याय की मांग कर रहे अंकिता के माता-पिता की गिरफ्तारी पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच पूरी होने और रिपोर्ट सार्वजनिक होने तक दुष्यंत कुमार गौतम को किसी संवैधानिक पद पर नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए। तिवारी ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की मांग की। तिवारी ने कहा कि अंकिता के माता-पिता अपनी बेटी को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में उनकी गिरफ्तारी और दूसरी ओर मामले में कथित रूप से संदिग्ध व्यक्ति को संवैधानिक पद पर नियुक्त किए जाने की चर्चा से प्रदेश की जनता में नाराजगी बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के संबंध में आरोपों का निर्धारण निष्पक्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने सरकार से जनभावनाओं और पीड़ित परिवार की मांगों को गंभीरता से लेने की अपील की। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के संयोजक ने बेरोजगारी, महंगाई, प्राकृतिक संसाधनों और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और न्याय जैसे मामलों में सरकार की जवाबदेही महत्वपूर्ण है। उन्होंने राज्य सरकार की एक महिला मंत्री की ओर से दुष्यंत कुमार गौतम के समर्थन में दिए गए बयान की भी आलोचना की। तिवारी ने राज्य आंदोलन के दौरान 2 अक्टूबर 1994 को मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा में आंदोलनकारियों पर हुए दमन और महिलाओं के साथ हुई यौन हिंसा का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं के पीड़ितों को पूर्ण न्याय नहीं मिल पाया है। उन्होंने कहा कि अंकिता प्रकरण में भी न्याय और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने कहा कि वह अंकिता के परिवार को न्याय दिलाने और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े सवालों पर आवाज उठाती रहेगी। तिवारी ने चेतावनी दी कि जनभावनाओं की अनदेखी होने पर जनता लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराएगी।
