श्रमिक नेताओं के जिला बदर के विरोध में मजदूर पंचायत, 22 नवंबर को होगी महापंचायत
हरिद्वार । श्रमिक नेताओं को जिला बदर करने की कार्रवाई के विरोध में रविवार को श्रमिक संगठनों ने रोशनाबाद स्थित जिलाधिकारी कार्यालय के पास मजदूर पंचायत कर सरकार और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश जताया। श्रमिक नेताओं ने आरोप लगाया कि मजदूरों की आवाज उठाने वालों को झूठे मुकदमों, गुंडा एक्ट और जिला बदर की कार्रवाई के जरिए दबाया जा रहा है। पंचायत में आंदोलन तेज करने का निर्णय लेते हुए 22 नवंबर को महापंचायत आयोजित करने की घोषणा की गई। पंचायत में वक्ताओं ने कहा कि शासन-प्रशासन पूंजीपतियों के इशारे पर काम कर रहा है। फैक्ट्रियों और कंपनियों में आठ घंटे काम कराने की बात कहकर श्रमिकों से 12 घंटे तक काम लिया जा रहा है। मजदूरों को उनके अधिकार मांगने पर प्रताड़ित किया जा रहा है। श्रमिक नेताओं पंकज, जयप्रकाश और ललित को जिला बदर किए जाने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि बिना उचित जांच के इस तरह की कार्रवाई करना गलत है। नेताओं के घरों पर पुलिस दबिश देने और मुकदमे दर्ज करने की कार्रवाई से मजदूरों में भय का माहौल बनाया जा रहा है। वक्ताओं ने कहा कि जब तक जिला बदर किए गए श्रमिक नेताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए जाते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने अंकिता भंडारी प्रकरण का जिक्र करते हुए भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। श्रमिक संगठनों ने मजदूरों, किसानों और श्रमिकों के अधिकारों की लड़ाई को और व्यापक बनाने की बात कही। पंचायत में 22 नवंबर को महापंचायत कर आगे की रणनीति तय करने का निर्णय लिया गया। इस दौरान खीमानंद जोशी, दीपा, महिपाल, रोहित रोहेला, गोविंद उचौली, अनिल, सतीश, नीता, रजनी, निशा, दिनेश कुमार, देवेंद्र, बृजपाल, मो. साब, अशोक चौधरी, मो. जोक, सत्यसिंह, मालती, अमित, सुशीला, यशवंत सिंह, रजत, ओमकार सिंह, शाहिद, चंद्रेश कुमार, भावना, राजकुमार, रवींद्र, सोनू सिंह और संदीप आदि मौजूद रहे।
