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November 4, 2026

बागेश्वर में अधिवक्ता धीरेंद्र परिहार हत्याकांड का सनसनीखेज खुलासा: महिला ने लोहे की रॉड से सिर पर किए दो वार, भाई के साथ मिलकर कार से नदी में फेंका शव

गुमशुदगी की जांच करते-करते हत्या तक पहुंची पुलिस, सीसीटीवी और मोबाइल सर्विलांस ने खोले राज; गोमती नदी के पास से सड़ी-गली अवस्था में बरामद हुआ धीरेंद्र उर्फ कक्कू का शव, हत्या में प्रयुक्त लोहे की रॉड और कार भी बरामद।

बागेश्वर। बागेश्वर के चर्चित पूर्व नगरपालिका सभासद धीरेंद्र परिहार उर्फ कक्कू हत्याकांड का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा कर दिया है। जिस युवक की तलाश में परिजन 18 दिनों तक दर-दर भटकते रहे, उसकी हत्या कर शव को नदी में फेंक दिए जाने की खौफनाक कहानी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, 17 अक्टूबर की रात अत्यधिक शराब के नशे में एक महिला के घर पहुंचे धीरेंद्र की विवाद के दौरान लोहे की रॉड से सिर पर दो वार कर हत्या कर दी गई। इसके बाद महिला ने शव को अपनी चारपाई के नीचे छिपा दिया। अगले दिन अपने भाई को पूरी घटना बताई और फिर दोनों ने मिलकर शव को कार की पिछली सीट पर रखकर बागेश्वर-गिरेछीना मोटर मार्ग के समीप थुनाई बैंड से नीचे नदी में फेंक दिया।

इस मामले में बागेश्वर पुलिस ने नुमाइशखेत निवासी 42 वर्षीय महिला लता भंडारी और कठायतबाड़ा निवासी उसके भाई 39 वर्षीय त्रिभुवन सिंह बिष्ट उर्फ बबलू को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दोनों की निशानदेही पर 3 नवंबर की शाम नदी के पास से धीरेंद्र का सड़ा-गला शव बरामद किया। हत्या में प्रयुक्त लोहे की रॉड और शव को ठिकाने लगाने में इस्तेमाल की गई मैग्नाइट कार संख्या UK02B 3843 भी बरामद कर ली गई है। इस खुलासे के बाद पूरे बागेश्वर में सनसनी फैल गई है।

17 अक्टूबर को बाजार जाने की बात कहकर घर से निकले थे धीरेंद्र

पुलिस के अनुसार, तल्ली बाजार बागनाथ वार्ड निवासी नंदी परिहार पत्नी गोविंद सिंह ने 31 अक्टूबर 2026 को कोतवाली बागेश्वर में अपने पुत्र धीरेंद्र परिहार उर्फ कक्कू (35 वर्ष) की गुमशुदगी की तहरीर दी थी। तहरीर में बताया गया था कि उनका पुत्र 17 अक्टूबर 2026 को शाम करीब छह बजे बागेश्वर बाजार जाने की बात कहकर घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा।

परिजनों ने अपने स्तर से काफी खोजबीन की। रिश्तेदारों, परिचितों और संभावित स्थानों पर तलाश की गई, लेकिन धीरेंद्र का कोई पता नहीं चला। आखिरकार 31 अक्टूबर को मां नंदी परिहार ने पुलिस से बेटे की तलाश करने की गुहार लगाई।

पुलिस ने तहरीर के आधार पर कोतवाली बागेश्वर में एफआईआर संख्या 79/26, धारा 140(3) बीएनएस के तहत अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक दारा सिंह को सौंपी गई।

एसपी के निर्देश पर गठित हुई विशेष पुलिस टीम

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक बागेश्वर जितेंद्र मेहरा ने तत्काल पुलिस उपाधीक्षक के निर्देशन और प्रभारी निरीक्षक कोतवाली बागेश्वर के नेतृत्व में विशेष पुलिस टीम गठित की। टीम को धीरेंद्र की सकुशल बरामदगी और मामले की तह तक पहुंचने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

पुलिस ने सबसे पहले गुमशुदा के घर के आसपास और थाना क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। सार्वजनिक स्थानों पर धीरेंद्र के फोटो वाले पंपलेट चस्पा किए गए और आम लोगों से जानकारी जुटाने के प्रयास किए गए।

इसके साथ ही पुलिस ने मोबाइल सर्विलांस का सहारा लिया। धीरेंद्र के मोबाइल नंबरों का तकनीकी विश्लेषण किया गया तो एक संदिग्ध मोबाइल नंबर सामने आया। जांच में पता चला कि धीरेंद्र की इस नंबर से लगातार बातचीत होती थी और गुमशुदगी वाले दिन भी उनकी आखिरी बातचीत इसी नंबर पर हुई थी।

मोबाइल नंबर की जांच से सामने आया महिला का नाम

पुलिस ने संदिग्ध मोबाइल नंबर की जानकारी जुटाई तो वह नुमाइशखेत निवासी लता भंडारी पत्नी स्वर्गीय मोहित भंडारी के नाम पर पंजीकृत मिला।

पुलिस टीम ने महिला से नियमानुसार पूछताछ की, लेकिन शुरुआत में उसने घटना के संबंध में कोई जानकारी होने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया और महिला के घर के आसपास सुरागरसी-पतारसी शुरू की।

क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों को चिह्नित कर उनकी फुटेज का बारीकी से अवलोकन किया गया। साथ ही चेकिंग अभियान भी चलाया गया। इसी दौरान पुलिस को एक अहम सुराग मिला।

2 नवंबर को चिल्ड्रन पार्क के पास मिली धीरेंद्र की स्कूटी

पुलिस जांच के दौरान धीरेंद्र की जूपिटर स्कूटी 2 नवंबर 2026 को नुमाइशखेत स्थित चिल्ड्रन पार्क के पास खड़ी मिली। यह बरामदगी जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हुई।

सीसीटीवी फुटेज के अवलोकन में 19 अक्टूबर की रात संदिग्ध महिला की कार असामान्य समय पर आती-जाती दिखाई दी। इस फुटेज के आधार पर पुलिस का शक और गहरा गया।

इसके बाद पुलिस ने महिला से दोबारा गहन पूछताछ की। इस बार पूछताछ में महिला ने कथित तौर पर पूरी घटना का खुलासा कर दिया। गुमशुदगी का मामला अब हत्या और शव छिपाने की सनसनीखेज वारदात में बदल चुका था।

शराब के नशे में घर पहुंचने पर हुआ विवाद, लोहे की रॉड से किए दो वार

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में लता भंडारी ने बताया कि 17 अक्टूबर की रात धीरेंद्र अत्यधिक शराब के नशे में उसके घर पहुंचे थे। महिला ने इसका विरोध किया। इसी दौरान दोनों के बीच विवाद बढ़ गया।

पुलिस के अनुसार, धीरेंद्र ने महिला के साथ कथित तौर पर जबरदस्ती करने का प्रयास किया। इससे गुस्से में आकर महिला ने घर में रखी लोहे की रॉड उठा ली और धीरेंद्र के सिर पर दो बार प्रहार कर दिया।

दोनों वार इतने गंभीर थे कि धीरेंद्र वहीं गिर पड़े। महिला के अनुसार, जब काफी देर तक उन्हें होश नहीं आया तो उसने उनके शव को अपनी चारपाई के नीचे छिपा दिया।

इस घटनाक्रम ने पुलिस को चौंका दिया। जिस युवक की तलाश में परिजन और पुलिस परेशान थे, उसकी हत्या हो चुकी थी और शव कई समय तक महिला के घर में छिपा रहा।

सुबह भाई को बताई पूरी घटना, रात में शव ठिकाने लगाने पहुंचे दोनों

पुलिस प्रेस नोट के मुताबिक, 18 अक्टूबर की सुबह लता भंडारी अपने भाई त्रिभुवन सिंह बिष्ट उर्फ बबलू को घटना की जानकारी देने कठायतबाड़ा पहुंची। उसने अपने भाई को पूरी वारदात के बारे में बताया।

इसके बाद दोनों ने शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई। महिला के भाई ने रात में उसके घर पहुंचकर शव को वहां से हटाने की बात कही।

योजना के अनुसार, रात में त्रिभुवन सिंह बिष्ट महिला के घर पहुंचा। इसके बाद दोनों ने मिलकर धीरेंद्र के शव को घर से बाहर निकाला और मैग्नाइट कार संख्या UK02B 3843 की पिछली सीट पर रख दिया।

रात के अंधेरे में दोनों कार लेकर बागेश्वर-गिरेछीना मोटर मार्ग की ओर रवाना हुए।

थुनाई बैंड से नीचे नदी में फेंका शव

पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी शव को कार में रखकर बागेश्वर-गिरेछीना मोटर मार्ग के समीप थुनाई बैंड पहुंचे। वहां से उन्होंने धीरेंद्र के शव को नीचे नदी में फेंक दिया।

इसके बाद दोनों वापस लौट गए। उन्हें लगा कि शव नदी में फेंकने के बाद हत्या का राज हमेशा के लिए दफन हो जाएगा, लेकिन पुलिस की तकनीकी जांच, सीसीटीवी फुटेज और लगातार की गई पूछताछ ने पूरे घटनाक्रम का पर्दाफाश कर दिया।

3 नवंबर की शाम नदी से बरामद हुआ सड़ा-गला शव

महिला और उसके भाई से पूछताछ के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को साथ लेकर बताए गए स्थान पर तलाशी अभियान चलाया। दोनों की निशानदेही पर पुलिस टीम ने नदी के आसपास सर्च अभियान चलाया।

काफी प्रयासों के बाद 3 नवंबर 2026 की शाम नदी के पास से धीरेंद्र परिहार का सड़ा-गला शव बरामद कर लिया गया।

पुलिस ने घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों और आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल की गई लोहे की रॉड तथा शव को ले जाने में प्रयुक्त मैग्नाइट कार भी बरामद कर ली।

शव बरामद होने के बाद पुलिस ने पंचायतनामा और पोस्टमार्टम की कार्रवाई की।

हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोप में दोनों गिरफ्तार

पुलिस ने मामले में शुरुआती गुमशुदगी के मुकदमे को हत्या और साक्ष्य मिटाने से संबंधित धाराओं में तरमीम कर दिया है।

अब मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 238 और 61(2) बीएनएस की बढ़ोतरी की गई है। मामले की विवेचना प्रभारी निरीक्षक कोतवाली बागेश्वर अनिल उपाध्याय ने ग्रहण की है।

पुलिस ने वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों को नियमानुसार माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया जा रहा है।

गिरफ्तार आरोपी

1. लता भंडारी (42 वर्ष)

पत्नी स्वर्गीय मोहित भंडारी

निवासी नुमाइशखेत, थाना व जनपद बागेश्वर।

2. त्रिभुवन सिंह बिष्ट उर्फ बबलू (39 वर्ष)

पुत्र मदन सिंह बिष्ट

निवासी कठायतबाड़ा, थाना व जनपद बागेश्वर।

पुलिस की जांच ने गुमशुदगी के रहस्य से उठाया पर्दा

इस पूरे हत्याकांड में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि धीरेंद्र की गुमशुदगी के बाद पुलिस को शुरुआत में कोई ठोस सुराग नहीं मिल रहा था। लेकिन मोबाइल सर्विलांस के जरिए संदिग्ध नंबर तक पहुंचना, सीसीटीवी फुटेज में महिला की कार की आवाजाही चिन्हित करना और नुमाइशखेत में धीरेंद्र की स्कूटी का मिलना जांच के अहम मोड़ साबित हुए।

पुलिस की इन्हीं कड़ियों को जोड़ने के बाद पूछताछ में कथित हत्याकांड का पूरा घटनाक्रम सामने आया। पुलिस ने न केवल शव बरामद किया, बल्कि हत्या में इस्तेमाल हथियार और शव को ले जाने वाली कार भी बरामद कर ली।

धीरेंद्र की हत्या से बागेश्वर में सनसनी, परिजनों पर टूटा दुखों का पहाड़

पूर्व नगरपालिका सभासद धीरेंद्र परिहार उर्फ कक्कू की हत्या की खबर सामने आने के बाद बागेश्वर में शोक और सनसनी का माहौल है। जिस धीरेंद्र के सुरक्षित घर लौटने की उम्मीद में परिजन लगातार उनकी तलाश कर रहे थे, उनकी हत्या की पुष्टि ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।

18 दिनों तक गुमशुदगी का मामला बने रहने के बाद जब हत्या और शव को नदी में फेंकने की कहानी सामने आई तो लोगों के बीच इस वारदात को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं।

एक ओर पुलिस ने तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मामले का खुलासा कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, वहीं दूसरी ओर अब सभी की निगाहें न्यायिक प्रक्रिया और आगे की विवेचना पर टिकी हैं।

बागेश्वर में इस हत्याकांड ने कई सवाल छोड़ दिए हैं। आखिर एक विवाद की परिणति इतनी खौफनाक वारदात में कैसे हुई? हत्या के बाद शव को छिपाने और नदी में फेंकने की पूरी योजना किस तरह बनाई गई? फिलहाल पुलिस के खुलासे के बाद मामले की तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है और अब न्यायालय में साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

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