April 20, 2026

असमंजस की स्थिति का सामना कर रहे हैं खण्डूड़ी

देहरादून ( आखरीआंख )  पूर्व मुयमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बीसी खण्डूरी असमंजस की स्थिति का सामना कर रहे हैं। खण्डूड़ी इस समय भाजपा में अपनी उपेक्षा से आहत है। एक तरफ उनकी पार्टी है और विधायका पुत्री है वहीं दूसरी तरफ पुत्र है। जिसे कांग्रेस ने पौड़ी से लोकसभा चुनाव मैदान में उतारा है। कशमकश यह है कि वह अब किसके साथ खड़े हो? भाजपा का प्रयास है कि चुनावी प्रचार की इस जंग में वह भाजपा के टिकट पर विधायक बनी उनकी पुत्री ऋ तु खण्डूरी को तथा पिता बीसी खण्डूरी को भी उनके पुत्र मनीष खण्डूरी के खिलाफ उतारे। भाजपा ने भले ही पौड़ी सीट से अपने इस दिग्गज नेता को टिकट न दिया हो लेकिन उनकी सेवा लेने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जा रही है। बीसी खण्डूरी को चुनाव समिति में शामिल कर लिया जाना भाजपा का ऐसा ही प्रयास है।
अभी बीते दिन खबर आयी कि आगामी 6 अप्रैल को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की होने वाली जनसभा में बीसी खण्डूरी अपने बेटे के समर्थन में मंच साझा करने जा रहे है। भले ही इस खबर की कहीं से अभी तक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन इस खबर ने भाजपा खेमे में हलचल जरूर पैदा कर दी। बीसी खण्डूरी जिन्हे अब भाजपा ने अपनी प्रचार समिति में शामिल कर लिया वह राहुल गांधी के साथ अपने पुत्र मनीष खण्डूरी का प्रचार करेंगे यह भला कैसे हो सकता है और अगर ऐसा होता है तो इसका मतलब होगा कि भाजपा से रिश्ता खत्म। बात यहंा तक भी अगर रहती तब भी ठीक था। उनकी पुत्री जो 2017 के विधानसभा चुनाव में पहली बार भाजपा से टिकट पाकर विधायक बनी है उनके राजनीतिक भविष्य का क्या होगा? भाजपा ऐसी पार्टी है कि वह फिर ऋतु खण्डूरी के भी पैर नहीं जमने देगी? सही मायने में जो खण्डूरी जो भाजपा के लिए कभी जरूरी हुआ करते थे वह अब कांग्रेस के लिए भी जरूरी हो चुके है।
वयोवद्ध नेता बीसी खण्डूरी अगर अपने पुत्र के साथ खड़े होते है तो उनकी जीत को कोई नहीं रोक पायेगा लेकिन उनका मनीष को खुला समर्थन बहुत आसान काम नहीं है भाजपा ने इस बात के लिए कमर कस ली है कि वह ऐसा हरगिज नहीं होने देगी। खबर यह भी है कि इस स्थिति में इस स्थिति में बीसी खण्डूरी स्वंय को तटस्थ ही रखेगें। जिन स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर पार्टी ने उन्हे किनारे किया उसी स्वास्थ्य कारण से वह भाजपा के चुनाव प्रचार से भी दूरी बनाकर रखेगें। लेकिन राजनीति जिसमें सब कुछ संभव है कुछ भी ठोस दावा नहीं किया जा सकता है हां इस स्थिति ने उन्हे बड़ी कशमकश में जरूर फंसा दिया है।